ऑस्ट्रेलिया की महिला आर्किटेक्ट बिहार के कुष्ठाश्रम में बना रही मिट्टी का घर

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विजय कुमार, रक्सौल-सात समुन्द्र पार ऑस्ट्रेलिया से रक्सौल पहुँच कर सुंदरपुर में कुष्ठरोगियों के लिए मिट्टी से छत की घर बना रही है मिस आस्टिन।ऐसी घर की खासियत और लागत के बारे में पूछने पर ऑस्टिन ने बताई की इस घर को बनाने में गेहूँ की भूसा,पिल्ली मिट्टी, बालू और बांस को मिलाकर घर को तैयार किया गया है।

पेंट की जगह माड़ का उपयोग किया गया।यह घर उच्च तापमान में भी हिट नही होता और ठण्ड के मौसम में ज्यादा ठण्ड की अहसास भी नही होता है।इसका लागत और मेंटनेस खर्च भी बहुत कम है। मिस अस्टिन ने बताई की वह अभी अर्टिटेक्ट की पढाई ऑस्ट्रेलिया में कर रही है।और प्रोजेक्ट के तौर पर यह घर बना रही है।

ऐसी घर को प्रोजेक्ट के तौर पर बनाने के लिए भारत को क्यों चुनी पूछने पर बताई की भारत की पिल्ली मिट्टी की खासियत दूसरे देशों की मिटटी में नही होती।भारतीय पिल्ली मिटटी से ऐसा घर बनाने पर घर मजबूत और चमकदार और खूबसूरत दिखता है।सेवा की भावना ने उसे रक्सौल स्थित कुष्ठ रोगियों की बस्ती की ओर खिंच लायी है जिसे कभी बाबा क्रिश्टो दास ने बसाया था।इस स्थान पर मदर टेरेसा की सेवा भावना की स्पष्ट झलक मिलती है स्वदेशी चरखे की चाल गांधी के सपने को सजाती है।

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