अनुदेशकों के साथ खेल खेल रहे हैं शिक्षा विभाग के अधिकारी

Bihar Society
विधि संवाददाता,पटना
याचिकाकर्ताओं के साथ खेल-खेल रहें हैं पदाधिकारी।  न तो वह अदालती आदेश का अनुपालन कर रहें हैं और ना ही याचिकाकर्ताओं का समायोजन क्यों नहीं कर रहे हैं ईसका ही कोई संतोषजनक जवाब  दे रहे हैं।  अदालत ने साफ तौर पर आगाह किया की या तो वह अदालती आदेश का दो  सप्ताह में अनुपालन करें या फिर  18 जुलाई को अदालत में स्वयं उपस्थित होकर यह बतायें की क्यों नहीं उनके विरुद्ध अवमानना का मामला चलाया जाय।
                                     पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शिवाजी पांडेय की एकलपीठ ने रंजीत कुमार एवं अन्य की ओर से दायर अवमानना वाद पर सुनवाई करते  उक्त तल्ख टिप्पणी की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आर. के. जैन ने अदालत को बताया की यह मामला शिक्षा विभाग के पूर्व अनुदेशकों से जुडा हुआ है।  पूर्व की सुनवाई में अदालत ने पूर्व अनुदेशकों को चतुर्थ वर्ग के पद पर समायोजन करने का निर्देश दिया था।  जिसके आलोक में विभाग ने 2240 पूर्व अनुदेशक की सूची तैयार कर दी।  वहीं अभी भी 1600 पूर्व अनुदेशक बाकी हैं।  अदालत को यह भी बताया गया की इस मामले को लेकर आठ याचिकाकर्ताओं ने अदालत में याचिका दायर की थी।  इनमें से छह याचिकाकर्ताओं का समायोजन अदालती आदेश के बाद कर ली गयी वहीं मामले के मुख्य याचिकाकर्ता सहित दो लोगों का समायोजन नहीं किया जा रहा है। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने शिक्षा विभाग के निदेशक को साफ लहजे में कहा कि याचिकाकर्ताओं के साथ अधिकारियों द्वारा खेल खेला जा रहा है।  अदालत ने शिक्षा विभाग में के निदेशक को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए साफ कहा कि वे दो सप्ताह के भीतर आदेश का अनुपालन करें या फिर अदालत में हाजिर होने के लिए तैयार रहें।
पूर्व एमएलसी
मनोज कुमार सिंह
को जमानत
विधि संवाददाता,पटना
सीवान के बहुचर्चित व्यवसायी हत्याकांड में पूर्व एम एल सी मनोज कुमार सिंह को पटना उच्च न्यायालय ने बडी  राहत प्रदान करते हुए  उनके विरुद्ध निषेधात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए निचली अदालत से केस डायरी की मांग की है।
              न्यायाधीश डा. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने पूर्व एम एल सी मनोज कुमार सिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया। गौरतलब है कि 15 नवम्बर 2015 को सीवान के पचरूखी थाना क्षेत्र निवासी व्यवसायी हरिशंकर सिंह का अपहरण कर हत्या कर दी गयी थी।  मामले में पचरूखी थाना में कांड संख्या 301/2015 दर्ज किया गया था।  मामले में पप्पू सिंह को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था। वहीं गिरफ्तार अभियुक्त  के इकबालिया बयान के आधार पर पूर्व एम एलसीडी को भी अभियुक्त बनाया गया।
फतुहा नगरपंचायत के नामांकन में एक दिन अतिरिक्त 
विधि संवाददाता,पटना
फतुहा नगर पंचायत को नगर परिषद के गठन में विवादित परिसीमन पर सुनवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय ने पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिया की वह परिसीमन का प्रावधानों के तहत पुन: निर्धारण करें साथ ही साथ अदालत ने पुन:निर्धारण वाले वार्डों के वैसे मतदाता जो चुनाव लडने के इच्छुक और नये परिसीमन के तहत दुसरे वार्डों में स्थानांतरित हो रहे हैं उन्हें राहत प्रदान करते हुए नामांकन हेतु एक अतिरिक्त दिन देने का निर्देश दिया।
न्यायाधीश एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एकलपीठ ने व्यास सिंह की ओर से दायर
याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया। गौरतलब है कि मामले में अदालत के बताया गया था कि वार्ड नं. 1 का कुछ हिस्सा काटकर वार्ड नं. 3 में शामिल कर दिया गया है। वहीं वार्ड नं. 4 का कुछ हिस्सा काटकर वार्ड नं. 1 में शामिल कर दिया गया है। अदालत को बताया गया की वार्डों के परिसीमन में प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। शिकायत करने और आपत्ति दर्ज कराने के बाद भी कोई काररवाई नहीं की गयी। अदालत को यह भी बताया गया कि इस सम्बंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पर उन्होंने दो सदस्यीय कमिटी का गठन कर दिया जिसमें पटना के एडीएम और बाढ़ के उपनिर्वाचन पदाधिकारी को शामिल कर दिया गया। इस दो सदस्यीय कमिटी ने जो रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी उसमें काफी आपसी मिलीभगत सहित कई अनियमितता पायी गयी थी। जिसपर अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज कर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिया था की वे इस मामले की पुन: जांच दो अधिकारियों की सदस्यता वाली कमिटी से तीन अधिवक्ताओं की देखरेख में पुनः करायें और जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। साथ ही साथ अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान पटना के एडीएम और बाढ के उप निर्वाचन पदाधिकारी को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। गुरुवार को पटना के जिलाधिकारी की ओर से जां रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत किया गया। जां रिपोर्ट में यह बताया गया कि परिसीमन के तहत वार्ड में मतदाताओं की संख्या 2300 होनी चाहिए थी वहीं जांच में 2500 पायी गयी। अदालत ने इसे सूक्ष्म गलती मानते हुए इसे सुधारने का निर्देश दिया। सुनवाई के क्रम में अदालत में पटना के एडीएम और बाढ के उप निर्वाचन पदाधिकारी भी उपस्थित थे।  जिन्हें अदालत ने चेतावनी देकर छोड दिया।

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