भारत नेपाल सीमा सील थी तो आधी रात में कैसे पार कर रहे थे ट्रक

National Society world

विजय कुमार, रक्सौल

नेपाल में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर गत शनिवार से 48 घण्टे तक के लिए बोर्डर सील कर दिया गया।इसके लिए दोनों देशों के अधिकारीयों के कॉर्डिनेशन कमिटी ने गत दिनों नेपाल के बीरगंज में बैठक भी किये थे।इस कारण देश-विदेश के पर्यटक नेपाल जाने के लिए रविवार से ही जद्दोजेहद करते रहे परन्तु एक भी दो पहिया या चारपहिया वाहनों के साथ ही रिक्शा व तांगे की आवाजाही पर भी प्रतिबन्ध रही।इससे दोनों देशों के मजदूर व आम यात्री काफी हलकान रहे।बावजूद,रात के अंधेरे में जो पैसे के बल पर सुरक्षा एजेंसियों ने खेल खेला,वह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है।जब मिडिया ई टीम के साथ बीडीएन संवाददाता ने इसकी गंभीरता की पड़ताल की तो कई चौंकानेवाले रहस्य उजागर हुए।रात के करीब 11 बजे टीम इंडियन कस्टम एरिया में पहुंची।अचानक वाहनों की शोर शुरू होती है।अंधेरे में वाहनों की लाइट की चकाचौध व आवाजों के बीच मालवाहक ट्रकों का तांता लग जाता है।फिर,ट्रकों को बॉर्डर पार भेजे जाने की कवायद शुरु होती है।कस्टम हाउस के आगे दो तीन लोग ‘ड्यूटी’ पर तैनात दिख रहे हैं।उनका इशारा और टोर्च की लाइट के बाद एक ,दो,तीन,और फिर अनगिनत ट्रक नेपाल के बीरगंज की ओर रवाना हो गए।आखिर यह क्यों व कैसे हुआ,समझ पाना थोड़ी मुश्किल था।


सवाल उठना लाजिमी है।कारण,बॉर्डर पर अलर्ट है।अगली सुबह यानी 18 सितम्बर को नेपाल के प्रदेश संख्या 2 में निकाय चुनाव है।साथ राम रहीम की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत को ले कर भी अलर्ट घोषित है।अपनी तैयारी के कारण नेपाल कस्टम ने शुक्रवार से ही अपना बॉर्डर का बैरियर गिरा रखा है।आवाजाही पर कड़ी निगरानी थी।आमलोगों के लिए वाहनों का परिचालन बन्द था।नेपाली कस्टम ने इंट्री भी बन्द कर रखी थी।कोई सवारी को नही आने -जाने दिया जा रहा था।
विगत ,दिनों पूर्व बीरगंज में बॉर्डर मीटिंग हुई थी।जिसमे बॉर्डर सील करने पर सहमति बनी थी।कड़ी सुरक्षा व निगरानी थी।
जब,नेपाल बॉर्डर सील था।तो,इन वाहनों को नेपाल के लिए प्रवेश अनुमति कैसे सम्भव हुआ।यह अपने आप ऊंच स्तरीय जाँच का मामला है।
मजे की बात रही कि जब ये मालवाहक वाहन रक्सौल कस्टम पहुंची ,तो,एक बाइक सवार सक्रिय रहा।जो शायद अपने निगहबानी में मालवाहक गाड़ियों को सीमा पार कराने में कड़ी का काम कर रहा था।एक ट्रक चालक ने बताया कि ट्रक नेपाल जाने के लिए प्रतीक्षा में दो दिनों से जाम में फंसे थे।पर,लक्ष्मीपुर में रक्सौल पुलिस ने कहा कि जिसका क्लियरेंस हो गया है वह आगे जाये।उसके बाद ही वाहन नेपाल की ओर रवाना हुई है।कुछ वाहन आगे गई।कुछ कतार में है।वहां काफी ट्रकें हैं।जो, आ रही है। इनमें विभिन्न प्रदेशों से आने वाले ट्रक भी शामिल थे।उस पर विभिन्न वस्तुएँ लदी थी।सभी के प्रपत्र तैयार थे।पर इसकी वैधता तो कस्टम ,एसएसबी या पुलिस ही बता सकती थी।कि सभी के प्रपत्र थे।या इसमें “बाई एयर”सिस्टम के भी ट्रक शामिल थे।जो, नेपाल जा रही थी। इस बाबत जब मीडिया टीम कस्टम उपायुक्त से सम्पर्क करने की कोशिश की, तो,वहां मौजूद एक शख्श ने बताया कि साहब से कल मुलाकात होगी।अभी यह वक्त मिलने का नही है।जबकि,कस्टम के प्रवक्ता हरिनाथ प्रसाद ने मोबाइल पर बताया कि चुनाव के लिए नेपाल का बोर्डर सील था।भारतीय कस्टम ने नेपाली कस्टम के द्वारा डिमांड पर ही मालवाहक ट्रको को रवाना किया गया।लेकिन रात के ग्यारह बजे ही ऐसा क्यों हुआ के सवाल पर बताया कि तेल टैंकर भेजे गए और कुछ मालवाहक गाड़ियां भी गयी होगी।ऐसा कोई आदेश नही था कि मालवाहक ट्रकों को कस्टम के द्वारा रोका जाय।
इधर,बॉर्डर से पहले एसएसबी चेकिंग पॉइंट पर भी इस बाबत कोई पूछ ताछ या जाँच नही हो रही थी।16 सितम्बर को बैलगाड़ी व ठेला पर जब एसएसबी ने नेपाल जा रहे कपड़ा को रोका व नियंत्रण में लेने की कोशिश की।तो,एक दूजें के अधिकार क्षेत्र को लेकर बवेला हो गया।कस्टम व एसएसबी आमने-सामने आ गए।मामला काफी मशक्कत के बाद शांत हुआ।जब ट्रकों की पासिंग देर रात्रि चल रही थी।तो,इस बाबत एसएसबी के कमांडेंट के मोबाइल से सम्पर्क का प्रयास विफल रहा,क्योंकि मोबाइल रिसीव करना गंवारा नही समझा गया।फिलहाल,भारत-नेपाल बोर्डर सील रहने में अधिकारीयों के माल कमाऊ पहरेदारी की चर्चा जोरों पर है।अटकलों का बाजार गर्म है।सबसे मजे की बात यह रही कि ट्रक ड्राइवर को ‘लाइन क्लियर’ मिलते ही सरपट मैत्री पुल पर चढ़ने यानी नेपाल जाने की अनुमति मिल रही थी।लेकिन,उस वक़्त यह जांच नही हो रही थी कि ट्रक में कहीं हनी प्रीत या विस्फोटक,हथियार आदि तो नही हैं।यह विश्वसनीयता का दिलचस्प पैमाना था।पर,आमलोगों की शिकायत इस पर भारी थी।ट्रेन से उतर कर नेपाल जाने के लिए पंहुचे कुछ लोगो को वहां रोक दिया गया कि बॉर्डर बन्द है।नेपाल के पर्सा जिला के महुवन के दिनेश प्रसाद,रमेश प्रसाद,जीतपुर के भेड़िहारी निवासी सुरेश कुमार,परवानीपुर के लिपनी निवासी मोहन साह आदि ने बताया कि वे अपने-अपने कार्य से पटना,दिल्ली आदि जगहों से चुनाव के लिए अपने घर लौट रहे है कुछ समान है साथ में,इसलिए नेपाल के लिए नही जाने दिया गया है।रिक्शा से बीरगंज बॉर्डर तक भी नही जाने दिया गया है।ऐसे में ट्रैकों की बिना रोक-टोक आवाजाही जाँच का गंभीर विषय है।

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