अंडर 19 में कहर बना बिहार का अनुकूल राय

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अनूप नारायण सिंह
बाएं हाथ के स्पिनर गेंदबाज अनुकूल रॉय ने आॅस्ट्रेलियाई के खिलाफ खिताबी मुकाबले में 32 रन देकर दो विकेट लिए और इसी के साथ रॉय 14 विकेट के साथ सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में संयुक्त रूप से शीर्ष पर है. अफगानिस्तान के गेंदबाज कैस अहमद और कनाडा के फैसल जमखंडी ने भी 14 विकेट लिए है.

रॉय ने टूर्नामेंट में खेले गए छह मैचों में 127 रन देकर कुल 14 विकेट लिए. उनका ओवर भी काफी किफायती रहा. उन्होंने टूर्नामेंट में 3. 84 की इकोनॉमी रेट से 33 ओवर फेंके. उनका बेस्ट 14 रन पर 5 विकेट था.

पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ उन्होंने 14 रन पर 5 विकेट और जिम्बाब्वे के खिलाफ 20 रन पर 4 विकेट लिए थे. इसके अलावा फाइनल में आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ 2 विकेट, सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 1 और बांग्लादेश के खिलाफ भी एक विकेट लिए थे. अनुकूल के अलावा अफगानिस्तान के अहमद और कनाडा टीम के फैजल ने भी 14 विकेट लिए.

वहीं भारत के स्पीड स्टार कमलेश नागरकोटी ने छह मैचों में 147 रन देकर कुल नौ विकेट लिए, वहीं शिवम मावी ने 170 देकर नौ विकेट लिए। टूर्नामेंट में नागरकोटी को बेस्ट बांग्लादेश के खिलाफ रहा. बांगलादेश के खिलाफ नागरकोटी ने 18 रन देकर तीन विकेट लिए. वहीं आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ टूर्नामेंट के शुरुआती मैच में 29 रन देकर तीन विकेट लिए थे. मावी ने भी सभी को अपनी गेंदबाजी से आकर्षित किया. मावी ने आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में 45 रन देकर 3 विकेट लिए थे.

बिहार के एक छोटे से शहर समस्तीपुर से है जहां के पटेल मैदान में उन्होंने क्रिकेट का ककहरा सीखा। अनुकूल जिन्हें लोग प्यार से छन्नू के नाम से भी बुलाते हैं के पिता सुधाकर राय एक एडवोकेट हैं, जबकि मां हाउसवाइफ हैं। पिता सुधाकर ने बताया कि मैंने अपने समय में क्रिकेट शौकिया तौर पर खेला था, घर में क्रिकेट को लेकर वैसा माहौल भी नहीं था लेकिन बेटा क्रिकेटर बनेगा इसका भरोसा जरूर था।
अनुकुल के पिता सुधाकर ने बताया कि उसने 2005 से ही क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वो अपने खेल को लेकर काफी सीरियस था शायद यही कारण है कि उसने खेल के लिये पढ़ाई को साइड कर दिया। अपने होम टाउन समस्तीपुर में जिला और लीग क्रिकेट खेलने के बाद वो बिहार क्रिकेट टीम के लिए चुना गया। बिहार में क्रिकेट के भविष्य पर संकट के बादल घिरे तो उसने बगैर देर किये झारखंड का रूख किया और उसके बाद वहीं से खेलने लगा। झारखंड जाने के बाद अनुकुल ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अनुकुल के पिता ने बताया कि मैंने उसका दाखिला भारतीय टीम के पूर्व गेंदबाद रह चुके वेंकटेश प्रसाद के क्लब में दिलवाया ताकि बेटे को सही दिशा और कोचिंग मिल सके।

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