पंच-सरपंच मतदाता बने तो बदल सकता है विधान परिषद का चुनावी गणित

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सम्राट चौधरी ने कहा- पंच-सरपंच को विधान परिषद में मतदाता बनाने को केंद्र को भेजा प्रस्ताव

मतदान का अधिकार मिला तो बिहार विधान परिषद की 24 सीटों में चुनावी गणित राज्य के पंच-सरपंच बदल सकते हैं. बिहार में पंच सरपंच को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्म हो गयी है. पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बताया कि विधान परिषद चुनाव में पंच-सरपंचों को भी मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों की तरह मतदान का अधिकार मिलेगा. पंच सरपंच महासंघ की वर्षों से यह मांग रही है कि विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकार कोटे के होनेवाले चुनावों में उनको भी मतदान का अधिकार दिया जाये. पंचायती राज मंत्री ने भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बताया कि स्थानीय प्राधिकार कोटे के चुनाव में पंच और सरपंचों को भी मतदान का अधिकार मिलना चाहिए.
पंचायत राज मंत्री सम्राट चौधरी ने आज बताया कि पंच व सरपंच को मतदाता बनाने को लेकर एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है. बिहार में ही पंच सरपंच को विधान परिषद चुनाव में वोटिंग का अधिकार नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को निर्णय लेना है कि पंच सरपंच को इस बार के विधान परिषद चुनाव में वोटिंग का अधिकार मिलेगा अथवा नहीं. अंतिम निर्णय विधि मंत्रालय की मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री को लेना है. बिहार सरकार ने पंच सरपंच को वोटिंग का अधिकार दिलाने को लेकर दो माह पहले ही भारत सरकार को रिपोर्ट भेज दिया है.
एक लाख से अधिक संख्या है पंचों व सरपंचों की
राज्य में ग्राम कचहरी व्यवस्था के तहत कुल एक लाख नौ हजार 634 (109634) पंच हैं जबकि 8067 सरपंच हैं. विधान परिषद चुनाव में पंच और सरपंचों को अधिकार मिला तो पूरा राजनीतिक समीकरण ही बदल जायेगा. बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था है जिसमें ग्राम पंचायत में वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों का चुनाव होता है. दूसरी ओर ग्राम कचहरी व्यवस्था के तहत पंच और सरपंचों का चुनाव किया जाता है. ग्राम कचहरी स्थानीय न्यायालय है जो अपने क्षेत्राधिकार के तहत मामलों की सुनवाई करती है.

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