बाल विवाह हुआ तो मुखिया व वार्ड सदस्य पर होगी कार्रवाई

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बाल विवाह रोकने को लेकर पंचायती राज विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. जिस ग्राम पंचायत के अंदर बाल विवाह की सूचना मिलती है तो पंचायत के मुखिया और वार्ड सदस्य पर कार्रवाई होगी. विभाग उनकी सदस्यता भी समाप्त करेगा. ऐसे में मुखिया व वार्ड सदस्य अपने कर्तव्यों का सम्यक निर्वहन नहीं करने के आरोप में मुखिया को पद से हटाने की कार्रवाई हो सकेगी. सामाजिक मुद्दों पर मुखिया एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों अगर बेहतर काम करते हैं तो उनके कार्यों के मूल्यांकन में इसे भी शामिल किया जायेगा. बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ काम करनेवाले पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जायेगा. राज्य व जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर ऐसे प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया जायेगा.
पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव मिहिर कुमार सिंह की ओर से सभी जिलाधिकारियों, जिला परिषद के सभी कार्यपालक पदाधिकारियों और जिला पंचायती राज पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है. पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा बिहार में बाल विवाह व दहेज प्रथा के मुद्दे पर सकारात्मक माहौल तैयार करने की दिशा में समाज सुधार अभियान आरंभ किया गया है. पंचायती राज मंत्री ने बताया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 22 (20) एवं धारा 47 (20) के अंतर्गत ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति को महिला एवं बाल कार्यक्रमों में सहभागिता करने का दायित्व सौंपा गया है. नियमावली, 2010 के नियम-9 (1) में भी ग्राम पंचायत के प्रधान को बाल विवाह की सूचना प्राप्त कर अग्रसारित करने वाले माध्यम के रूप में चिह्नित किया गया है. राज्य सरकार बाल विवाह प्रतिषेध एवं दहेज प्रथा उन्मूलन के बिन्दु पर पंचायतों एवं उनके प्रतिनिधियों के लिए कई निर्देश जारी किया है. बाल विवाह से संबंधित मामला संज्ञान में आने पर मुखिया द्वारा इसकी त्वरित सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी (सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी) तथा अनुमंडल पदाधिकारी (बाल विवाह निषेध पदाधिकारी) को देते हुए बाल विवाह को रूकवाने का काम करेंगे. दहेज लेन-देन से संबंधित मामला संज्ञान में आने पर जिला कल्याण पदाधिकारी (दहेज प्रतिषेध पदाधिकारी) को सूचित करते हुए कार्रवाई से अवगत करायेंगे. बिहार विवाह पंजीकरण नियमावली, 2006 में मुखिया को विवाह पंजीकरण का दायित्व दिया गया है. विवाह पंजीकरण के लिए विवाहों का वैध होना अनिवार्य है. पंचायत क्षेत्र अंतर्गत हर वैध विवाह का पंजीकरण करना मुखिया एवं पंचायत सचिव के लिए अनिवार्य होगा. विवाहों को पंजीकृत करने से बाल विवाह के मामलों में अंकुश लगाया जा सकता है. प्रत्येक ग्राम सभा एवं वार्ड सभा की बैठक में एजेंडे में बाल विवाह प्रतिषेध एवं दहेज उन्मूलन का बिन्दु अवश्य सम्मिलित किया जायेगा. बैठकों में बाल विवाह एवं दहेज से होने वाली हानियों और दुष्प्रभावों की चर्चा की जायेगी. पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सामान्य बैठकों में भी इन विषयों पर चर्चा की जायेगी. ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद की सामाजिक न्याय समिति भी बाल विवाह निषेध एवं दहेज उन्मूलन के बिन्दु पर अपनी बैठकों में चर्चा करेगी और अभियान को सफल बनाने हेतु ग्राम पंचायत को अपनी अनुशंसाएं देगी. बाल विवाह होने की संभावना की सूचना प्राप्त होते ही वार्ड सदस्य व मुखिया संबंधित परिवार के घर पहुंचकर अभिभावकों को समझायेंगे और ऐसा न करने की सलाह देंगे. नहीं मानने पर स्थानीय थाना एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी (प्रखंड विकास पदाधिकारी/अनुमंडल पदाधिकारी) को तुरंत सूचना देंगे और विवाह रूकवाने में उनका सहयोग करेंगे. ऐसे अवसर या कार्याधिकार क्षेत्र को कोई स्थान विशेष जहां बाल विवाह कराने की कोई परंपरा अथवा सूचना हो, तो मुखिया जिला पदाधिकारी, बाल विवाह निषेध अधिकारी के सहयोग से निषेधाज्ञा लगवाने व अनुष्ठान रोकने में सहयोग देंगे.

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