नगरपालिका चुनाव में आरक्षण का फार्मूला तय, चुनाव का रास्ता साफ

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पुराने आरक्षण के फार्मूले पर होगा नगरपालिका चुनाव

बिहार में नगरपालिका आम चुनाव 2022 का रास्ता साफ हो गया है. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी नगरपालिकाओं में आरक्षण का फार्मूला निर्धारित कर दिया है. अब राज्य की सभी नगरपालिकाओं में पुराने पैटर्न पर अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन जातियों और ओबीसी को आरक्षण का लाभ मिलेगा. आयोग ने पूर्व निर्धारित फार्मूले पर ही राज्य में नवगठित, सीमा विस्तारित या उत्क्रमित नगरपालिकाओं में आरक्षण के प्रावधान का निर्देश शुक्रवार को जारी कर दिया है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त व सभी जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) को निर्देश दिया है कि वर्ष 2022 में राज्य की 248 नगरपालिकाओं में आम निर्वाचन संपन्न कराया जाना है. इनमें से 172 नवगठित, उत्क्रमित या क्षेत्र विस्तारित नगर निकाय हैं जबकि 10 यथास्थिति वाले नगर निकाय हैं. यथा स्थिति वाले नगर निकायों में नगर निगम मुंगेर, नगर निगम कटिहार, नगर निगम पूर्णिया, नगर निगम बेगूसराय के अलावा नगर परिषद हिलसा, नगर परिषद अरवल, नगर परिषद बेनीपुर के साथ नगर पंचायत मोहनिया, नगर परिषद एकमा बाजार और नगर परिषद परसा बाजार शामिल हैं. पूर्व में गठित नगर निकायों में कुल 62 पार्षदों के आरक्षण में बिहार नगरपालिका अधिनियम 12 के (दो क्रमिक निर्वाचन) के अनुसार कोई बदलाव नहीं किया गया है. आयोग ने आयुक्तों व जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रम में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा राज्य सरकार के निर्णय उपलब्ध कराया गया है. इसके आलोक में विभिन्न कोटि के लिए आरक्षण का निर्धारण बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007(यथा संशोधित) एवं बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 2007 (यथा संशोधित) के अनुसार किया जाना है. पत्र में कहा गया है कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 12(2) के अनुसार हर नगरपालिका में सदस्यों के कुल स्थानों का 50 प्रतिशत के निकट किंतु इससे अधिक स्थान के लिए आरक्षण किया जाना है. इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित स्थानों का अनुपात उस नगरपालिकाओं में प्रत्यक्ष निर्वाचनों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथा संभव निकटतम उसी अनुपात में होगा जो उस नगरपालिका क्षेत्र में एससी व एसटी जातियों की जनसंख्या होगी. एससी व एसटी जातियों के लिए स्थानों के आरक्षण के बाद शेष स्थानों में पिछड़े वर्गों (एनेक्सचर-1) के लिए आरक्षित किये जानेवाले स्थानों की संख्या कुल स्थानों के 20 प्रतिशत के निकटतम होगी पर उससे अधिक नहीं होगी. इस प्रकार से सभी प्रकार के आरक्षण का प्रावधान 50 प्रतिशत के अंदर होगा. अगर किसी कोटि में मात्र एक ही पद उपलब्ध है तो यह महिला के लिए आरक्षित नहीं किया जायेगा. जिला दंडाधिकारी द्वारा आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की सूची का प्रकाशन किया जायेगा. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से राज्य की नगरपालिकाओं के वार्डों के गठन का कार्य पांच चरणों में कराया है. साथ ही इन नगरपालिकाओं की मतदाता सूची का निर्माण भी नये सिरे से कराया गया है. आयोग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि सभी नगरपालिकाओं के मतदान के लिए बूथों के गठन का कार्य भी पूर्ण कर लिया जाये. आयोग की ओर से पहले चरण में 144 नगरपालिकाओं का, दूसरे चरण में 80 नगरपालिकाओं का, तीसरे चरण में छह नगरपालिकाओं का, चौथे चरण में नौ नगरपालिकाओं का और पांचवें चरण में पांच नगरपालिकाओं के वार्डों का परिसीमन, मतदाता सूची की तैयारी और बूथों के गठन की तैयारी कराने का निर्देश जारी किया है.

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