साइबर अपराध की दुनिया ने अब सरकारी तंत्र के अंदर तक अपनी पैठ बना ली है। अरवल जिले के कलेर प्रखंड से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के आरोप में एक पंचायत सचिव को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश की रायगढ़ पुलिस, पटना एसटीएफ और स्थानीय कलेर थाना पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन का नतीजा है। आरोपी की पहचान टोनी कुमार के रूप में हुई है, जो गोपालगंज जिले के छपिया गांव का निवासी है और फिलहाल कलेर में पंचायत सचिव के पद पर तैनात था।
132 सिम कार्ड और डिजिटल जालसाजी का नेटवर्क
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी टोनी कुमार ने पिछले एक साल के भीतर करीब 132 सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था। इतने बड़े पैमाने पर सिम कार्ड का उपयोग करना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि वह साइबर फ्रॉड के एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा था। आमतौर पर साइबर अपराधी अपनी लोकेशन छुपाने और पुलिस की ट्रैकिंग से बचने के लिए लगातार सिम बदलते रहते हैं, और टोनी कुमार ने इसी तरीके का इस्तेमाल कर 10 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी ने न केवल सिम कार्ड बदले बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई बैंक खाते भी खुलवाए थे। वह अपनी सरकारी नौकरी की आड़ में इस अवैध धंधे को चला रहा था। पंचायत सचिव के पद पर होने के कारण उसे समाज में एक रसूखदार व्यक्ति के रूप में देखा जाता था, जिसका फायदा उठाकर वह लोगों को विश्वास में लेने का काम करता था। उसकी गिरफ्तारी से इस साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में पुलिस को बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है।
THAR गाड़ी और रसूख का दिखावा
स्थानीय लोगों के बीच टोनी कुमार अपनी ‘थार’ (Thar) गाड़ी को लेकर काफी चर्चा में रहता था। एक सरकारी कर्मचारी की आय और उसके रहन-सहन के बीच के अंतर ने कई लोगों का ध्यान खींचा था। वह अपनी इस महंगी गाड़ी के जरिए अपना रौब जमाता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। अक्सर साइबर अपराधी अपनी पहचान छुपाने के लिए दिखावे का सहारा लेते हैं, और टोनी कुमार ने भी इसी रणनीति को अपनाया था।
शनिवार की रात जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो स्थानीय लोगों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। कलेर थाना प्रभारी गुड्डू कुमार ने पुष्टि की है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने वारंट के आधार पर उसे हिरासत में लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर उसने 10 करोड़ रुपये की ठगी किन-किन राज्यों में की और उसके तार देश के किन अन्य हिस्सों से जुड़े हुए हैं।
साइबर सुरक्षा के प्रति बढ़ती चिंता
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर क्राइम अब सिर्फ तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी पदों पर बैठे लोग भी शामिल हो रहे हैं। 132 सिम कार्ड का इस्तेमाल करना और एक साल के भीतर इतनी बड़ी राशि की ठगी करना एक संगठित अपराध का संकेत है। प्रशासन और पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
वर्तमान में डिजिटल ट्रांजैक्शन की बढ़ती संख्या के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक डिटेल्स या ओटीपी शेयर न करें। पंचायत सचिव जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का इस तरह के अपराध में लिप्त होना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि पुलिस की पूछताछ में और भी कई नाम सामने आ सकते हैं।

