बिहार की राजधानी पटना का गर्दनीबाग धरना स्थल अक्सर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों की गूंज से भरा रहता है। लेकिन, इस बार वहां का नजारा बेहद अलग और चौंकाने वाला था। बिहार पुलिस ड्राइवर बहाली की प्रक्रिया से जुड़े सैकड़ों अभ्यर्थी एक अनूठे प्रदर्शन के साथ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘हनुमान’ का स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना की और उनसे अपनी समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई।
हाथों में तिल के तेल वाले दीये, सिर पर कलश और नंगे पैर धरना स्थल से मार्च निकालते हुए इन अभ्यर्थियों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी बहाली को लेकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुँचाने की यह कोशिश सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी खूब सुर्खियां बटोर रही है।
खाली पदों को भरने की मांग
इस पूरे आंदोलन के पीछे का मुख्य कारण पुलिस ड्राइवर के रिक्त पड़े पद हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, बिहार पुलिस ड्राइवर की बहाली में महिलाओं के लिए आरक्षित करीब 1200 सीटें अभी भी खाली पड़ी हैं। इन सीटों के खाली रहने का कारण योग्य महिला अभ्यर्थियों का न मिलना बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी पुरुष अभ्यर्थियों का स्पष्ट तर्क है कि जब इन सीटों पर दावेदारी करने वाली महिला उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, तो इन रिक्तियों को खाली क्यों रखा जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि इन 1200 खाली सीटों को पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आवंटित किया जाए। उनका कहना है कि जो विज्ञापन पहले निकाला गया था, उसी में इन सीटों को शामिल करते हुए पूरी बहाली प्रक्रिया को संपन्न किया जाना चाहिए। इससे न केवल बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि पुलिस विभाग में चालकों की कमी की समस्या भी दूर होगी। अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि उनकी इस अनोखी प्रार्थना को सरकार गंभीरता से लेगी और जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला सुनाएगी।
प्रशासन और सरकार पर दबाव
बिहार में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली बहाली प्रक्रिया अक्सर विवादों और देरी का शिकार होती रही है। ऐसे में, गर्दनीबाग में हो रहा यह प्रदर्शन सरकार पर दबाव बनाने का एक तरीका है। अभ्यर्थियों का मानना है कि वे अपनी योग्यता साबित करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण उनकी भर्ती प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। सम्राट चौधरी को हनुमान मानकर पूजा करने के पीछे का संदेश यह है कि वे ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हुए अभ्यर्थियों की समस्याओं को दूर करें।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं। कई युवाओं की उम्र सीमा भी अब समाप्त होने की कगार पर है, जिससे उनके लिए भविष्य का संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रिक्त सीटों को भरने के लिए अधिसूचना जारी करें। प्रशासन की ओर से अभी तक इस विशेष प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
यह पूरा मामला बिहार में रोजगार के अवसरों और भर्ती प्रक्रिया के प्रबंधन पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या सरकार इन खाली सीटों को भरने के लिए नियमों में कोई बदलाव करेगी या फिर यह मामला इसी तरह ठंडे बस्ते में पड़ा रहेगा, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल, गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों का हुजूम अपनी उम्मीदों के साथ डटा हुआ है और राज्य की राजनीति में इस प्रदर्शन की गूंज सुनाई दे रही है।

