पटना | 25 सितंबर 2026: विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर शुक्रवार को बिहार में बीफार्म फार्मासिस्टों और फार्मेसी छात्रों ने फार्मासिस्ट बहाली में B.Pharm अभ्यर्थियों को शामिल करने और केंद्रीय फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम-2025 को बिहार में लागू करने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर राज्य सरकार की मौजूदा भर्ती व्यवस्था के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार स्वास्थ्य विभाग की 2024 की संशोधित फार्मासिस्ट कैडर नियमावली के बाद बीफार्म डिग्रीधारी और पंजीकृत फार्मासिस्टों को सरकारी फार्मासिस्ट भर्ती में अवसर से वंचित किया जा रहा है। बिहार में 2024 में फार्मासिस्ट कैडर नियमों में संशोधन किया गया था, जिसमें भर्ती प्रक्रिया और पात्रता से संबंधित प्रावधान बदले गए।
2 अक्टूबर से भूख हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन
कैंडल मार्च में शामिल फार्मासिस्टों ने ऐलान किया कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर 2026 से भूख हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि बीफार्म डिग्रीधारी एवं राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकृत फार्मासिस्टों को सरकारी फार्मासिस्ट भर्ती में शामिल किया जाए। बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अनुसार फार्मेसी में डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले पात्र अभ्यर्थी राज्य में फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।
2473 पदों की बहाली का मुद्दा
फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों का दावा है कि पहले की नियमित और संविदा बहालियों में बीफार्म फार्मासिस्टों को अवसर मिलता रहा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार 2473 पदों की बहाली के दौरान बड़ी संख्या में बीफार्म अभ्यर्थी अवसर से बाहर हो गए और कई पद खाली रह गए।
हालांकि, 2473 पद, लगभग 25 हजार बीफार्म फार्मासिस्ट और 1600 पद खाली रहने के आंकड़े प्रदर्शनकारियों द्वारा बताए गए हैं; इन आंकड़ों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है।
फार्मेसी एक्ट की धारा 42 का हवाला
कैंडल मार्च में शामिल अर्जेश राज ने Pharmacy Act, 1948 की धारा 42 का हवाला देते हुए कहा कि दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर कंपाउंडिंग, तैयारी, मिश्रण या डिस्पेंसिंग का काम पंजीकृत फार्मासिस्ट के अलावा कोई अन्य व्यक्ति नहीं कर सकता। Pharmacy Council of India की FAQ में भी धारा 42 के इसी प्रावधान को स्पष्ट किया गया है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब बीफार्म डिग्रीधारी राज्य फार्मेसी काउंसिल में पंजीकृत फार्मासिस्ट हो सकते हैं, तो सरकारी फार्मासिस्ट भर्ती में उनकी पात्रता को लेकर अलग व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
केंद्रीय फार्मासिस्ट विनियम-2025 को बिहार में लागू करने की मांग
आंदोलनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग Pharmacist Recruitment, Promotion and Service Regulations, 2025 को बिहार में लागू करने की है।
भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार Pharmacy Council of India ने Pharmacy Act, 1948 की धारा 10 और 18 के तहत केंद्र सरकार की मंजूरी से ये विनियम बनाए हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि ये विनियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे और इनका उद्देश्य फार्मेसी सेवाओं में भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्तों और कार्य दायित्वों को विनियमित करना है।
रवि रंजन कुमार ने मांग की कि इन केंद्रीय विनियमों के आधार पर बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती की शैक्षणिक योग्यता, वेतन स्तर, पदोन्नति संवर्ग और पदों का निर्धारण किया जाए।
फार्मासिस्ट निदेशालय बनाने की भी मांग
फार्मासिस्ट अभिमन्यु कश्यप ने कहा कि बिहार में फार्मेसी से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अलग फार्मासिस्ट निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग में संबंधित उच्च पदों की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे भर्ती, पदोन्नति और सेवा संबंधी मामलों में स्पष्टता आ सकती है।
बीफार्म बनाम डीफार्म की पात्रता पर विवाद
छात्र नेता दिव्यांशु राज ने कहा कि फार्मेसी शिक्षा में डिग्री और डिप्लोमा दोनों योग्यताओं को लेकर भर्ती नियमों में स्पष्टता जरूरी है। वहीं विमल कुमार ने दावा किया कि केंद्र सरकार के विभिन्न संस्थानों और कुछ राज्यों में फार्मासिस्ट पदों पर बीफार्म डिग्रीधारियों को अवसर दिया जाता है।
इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बिहार की 2024 की संशोधित कैडर नियमावली को लेकर B.Pharm/M.Pharm डिग्रीधारियों की पात्रता का मामला न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले में बिहार के संशोधित फार्मासिस्ट कैडर नियमों और B.Pharm/M.Pharm डिग्रीधारियों की पात्रता से जुड़ा विवाद दर्ज है।
सैकड़ों फार्मासिस्ट और छात्र हुए शामिल
कैंडल मार्च में अभिषेक कुमार, आशुतोष, अंकित, राजदीप, प्रीति, अभिमन्यु, भास्कर, दिवाकर, दीपक, पंकज, दिव्या और पूजा समेत बड़ी संख्या में फार्मेसी छात्र एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 2 अक्टूबर से आंदोलन का अगला चरण शुरू होगा। उनकी मांग है कि बीफार्म फार्मासिस्टों को सरकारी बहाली में अवसर दिया जाए और केंद्र के 2025 के फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियमों के अनुरूप बिहार में भर्ती और सेवा संरचना तैयार की जाए।
मुख्य मांगें:
- B.Pharm फार्मासिस्टों को सरकारी भर्ती में शामिल करना
- बिहार में केंद्रीय फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा विनियम-2025 लागू करना
- फार्मेसी ऑफिसर के पदों का सृजन
- भर्ती एवं पदोन्नति संवर्ग का निर्धारण
- फार्मासिस्टों के लिए अलग निदेशालय की व्यवस्था
- 2 अक्टूबर से प्रस्तावित भूख हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन पर सरकार की पहल

