बिहार की जेलों में बंद सजा काट रहे कैदियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने गांधी जयंती, यानी 2 अक्टूबर 2026 के अवसर पर एक विशेष ‘परिहार’ (Remission) नीति लागू करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत, जेलों में बंद उन कैदियों को समयपूर्व रिहाई (Premature Release) का मौका दिया जाएगा, जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों और शर्तों को पूरा करते हैं। यह एक विशेष एकमुश्त उपाय है, जिसका उद्देश्य जेलों पर दबाव कम करने के साथ ही उन कैदियों को मुख्यधारा में लौटने का मौका देना है, जिन्होंने अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है या जो विशेष परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
किन कैदियों को मिलेगी रिहाई की सौगात?
बिहार सरकार ने अपनी इस विशेष योजना के लिए कई श्रेणियां निर्धारित की हैं। यह लाभ सभी कैदियों को नहीं मिलेगा, बल्कि इसमें उम्र, जेल में बिताई गई वास्तविक सजा, कैदी का जेल के अंदर आचरण, शारीरिक स्वास्थ्य और अपराध की गंभीरता जैसे कारकों को आधार बनाया गया है। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के आजीवन कारावास वाले वे पुरुष और महिला कैदी, जिन्होंने अपनी 14 वर्ष की वास्तविक कैद पूरी कर ली है, वे रिहाई के लिए विचार योग्य होंगे। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी राहत यह है कि उन्हें परिहार सहित 20 वर्ष की अवधि पूरी करने की अनिवार्यता से छूट दी गई है।
इसके अलावा, जो कैदी गंभीर बीमारियों या ‘टर्मिनल इलनेस’ से जूझ रहे हैं, उनके लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे आजीवन कारावास के दोषियों की रिहाई पर मेडिकल बोर्ड की सिफारिश के आधार पर विचार किया जाएगा। वहीं, 65 वर्ष से अधिक आयु के वे कैदी जिन्होंने 7 वर्ष की वास्तविक जेल और परिहार सहित कुल 10 वर्ष की सजा काट ली है, वे भी इस सूची में शामिल हैं। साथ ही, 50 प्रतिशत सजा काट चुके 65+ आयु वर्ग के कैदियों और 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले दोषियों के लिए भी रिहाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आर्थिक रूप से कमजोर वे कैदी जो सजा तो काट चुके हैं, लेकिन जुर्माने की राशि नहीं भर पाने के कारण जेल में बंद हैं, उनके मामलों में जिला स्तरीय समिति विशेष जांच के बाद राहत प्रदान करेगी।
किन अपराधों में नहीं मिलेगा लाभ और क्या है प्रक्रिया?
सरकार ने इस विशेष रिहाई योजना से गंभीर अपराधों को पूरी तरह बाहर रखा है। इसमें आतंकवादी गतिविधियों, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले अपराध, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, जाली मुद्रा, और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के दोषियों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, बलात्कार के साथ हत्या, डकैती के साथ हत्या, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से संबंधित अपराध, मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, एनडीपीएस (NDPS) और भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त दोषियों को इस विशेष परिहार नीति का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
रिहाई की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है। जिला पदाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में बनने वाली इस समिति में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला अभियोजन पदाधिकारी और जेल अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण सदस्य शामिल होंगे। यह समिति प्रत्येक कैदी के व्यक्तिगत आचरण, अपराध की प्रकृति और पात्रता की बारीकी से जांच करेगी। इसके बाद ही मामले को राज्य स्तरीय समिति के पास अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। ध्यान रहे कि यह रिहाई स्वतः नहीं होगी, बल्कि पूरी तरह से जांच और नियमों के अधीन होगी।
सजा की गणना के लिए 1 अक्टूबर 2026 को कट-ऑफ तिथि माना गया है। कैदी की उम्र का निर्धारण मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट या आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर होगा। राज्य सरकार का यह कदम जेल सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें 2 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि कितने कैदी अपनी स्वतंत्रता के साथ घर वापसी कर सकेंगे। यह नीति न केवल मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि जेल प्रशासन के प्रबंधन में भी सुधार लाने में मददगार साबित होगी।

