बिहार की राजधानी पटना में स्थित गर्दनीबाग का इलाका मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026 को बी.फार्म (B.Pharm) डिग्रीधारकों के भारी विरोध प्रदर्शन का गवाह बना। राज्य भर से आए हजारों फार्मासिस्टों ने बिहार सरकार की फार्मासिस्ट बहाली नियमावली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी फार्मासिस्टों की मुख्य मांग है कि उन्हें राज्य की सरकारी भर्तियों में शामिल किया जाए और केंद्र सरकार द्वारा जारी नए ‘फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति और सेवा विनिमय 2025’ को बिहार में अविलंब लागू किया जाए।

नियमावली में बदलाव और बी.फार्म छात्रों का भविष्य

इस आंदोलन की नींव साल 2024 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए उस संशोधन के बाद पड़ी, जिसमें बी.फार्म डिग्रीधारकों को फार्मासिस्ट की बहाली प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के लगभग 25 हजार बी.फार्म फार्मासिस्टों पर पड़ा। परिणाम यह हुआ कि 2473 पदों के लिए निकाली गई बहाली में से करीब 1600 पद खाली रह गए, क्योंकि योग्य बी.फार्म उम्मीदवारों को आवेदन करने से रोक दिया गया था।

धरना स्थल पर मौजूद संयोजक अर्जेश राज ने कहा कि फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 स्पष्ट रूप से ‘निबंधित फार्मासिस्ट’ (Registered Pharmacist) की बहाली की बात करती है। बी.फार्म और डी.फार्म दोनों ही डिग्रीधारक राज्य फार्मेसी काउंसिल के पास रजिस्टर्ड हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने भेदभावपूर्ण रवैया अपनाते हुए बी.फार्म धारकों को बाहर कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पूर्व में 1999, 2006, 2013 और 2016 की बहाली प्रक्रिया में बी.फार्म डिग्रीधारकों को न केवल मौका मिला, बल्कि वे आज भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

केंद्रीय विनिमय और फार्मेसी निदेशालय की मांग

छात्र नेता दिव्यांशु राज ने वैश्विक स्तर पर फार्मेसी शिक्षा के मानकों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर में डी.फार्म कोर्स का महत्व कम हो रहा है और बी.फार्म को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय पुरानी व्यवस्था को थोप रही है। विमल कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि एम्स, रेलवे और ईएसआईसी जैसे केंद्रीय संस्थानों में बी.फार्म फार्मासिस्टों को ही वरीयता दी जाती है, तो बिहार में इसके विपरीत नियम क्यों बनाए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने ‘फार्मासिस्ट भर्ती, पदोन्नति और सेवा विनिमय 2025’ को बिहार में पूरी तरह लागू करने की मांग को अपना मुख्य एजेंडा बनाया है। रवि रंजन कुमार ने कहा कि यह विनिमय पूरे देश में फार्मासिस्टों के वेतन, पदोन्नति और कार्य दायित्वों में समरूपता लाने के लिए लाया गया है। जयकरण कुमार ने स्पष्ट किया कि 10 जून 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद यह विनिमय प्रभावी हो चुका है, लेकिन बिहार सरकार अभी भी पुरानी और त्रुटिपूर्ण नियमावली के सहारे भर्ती कर रही है।

प्रशासनिक सुधार और फार्मासिस्टों का भविष्य

आंदोलनकारी फार्मासिस्ट अभिमन्यु कश्यप ने एक महत्वपूर्ण पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान में फार्मेसी का अपना कोई निदेशालय नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस विनिमय के लागू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसी निदेशालय का गठन हो और संयुक्त निदेशक (Joint Director) का पद सृजित किया जाए। इससे फार्मासिस्टों से जुड़े नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता आएगी और विवादों का समाधान हो सकेगा।

गर्दनीबाग में शुरू हुए इस अनशन और प्रदर्शन में अनिश, रोनित, रौशन, आसिफ, अभिषेक कुमार, आशुतोष, अंकित, राजदीप, प्रीति, दिव्या, पूजा, कृति, रिया, सोनी, भास्कर, दिवाकर, दीपक और पंकज समेत सैकड़ों की संख्या में छात्र और निबंधित फार्मासिस्ट शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को मानकर नई नियमावली के तहत बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं करती, तब तक उनका चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। यह आंदोलन अब बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिस पर सरकार को जल्द ही ठोस निर्णय लेना होगा।

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