बिहार के विकास को नई उड़ान देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी एयरपोर्ट परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में अजगैबीनाथ धाम और सोनपुर (सारण) में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं के मास्टर प्लान और क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। इन दोनों प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य न केवल राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को एक नई दिशा प्रदान करना भी है। सरकार ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।

अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट: धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क का नया केंद्र

अजगैबीनाथ धाम में बनने वाला प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। समीक्षा बैठक में प्रस्तुत मास्टर प्लान के अनुसार, इस एयरपोर्ट को बड़े विमानों के संचालन के अनुकूल विकसित किया जाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक रन-वे और आवश्यक आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा। यह एयरपोर्ट मुंगेर, लखीसराय, जमुई, भागलपुर, बांका, खगड़िया और बेगूसराय जैसे जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा बनेगा।

खासकर श्रावणी मेले के दौरान, जब लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम आते हैं, तब इस एयरपोर्ट की उपयोगिता कई गुना बढ़ जाएगी। बेहतर हवाई सुविधा मिलने से देश के विभिन्न कोनों से आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में भारी सहूलियत होगी। इस परियोजना के पहले चरण में लगभग 3500 करोड़ रुपये का भारी निवेश पीपीपी (PPP) मोड पर प्रस्तावित है, जो क्षेत्र में रोजगार और व्यापार के नए अवसर खोलेगा।

सोनपुर एयरपोर्ट: कार्गो और कनेक्टिविटी का हब

सोनपुर (सारण) में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बिहार के एक प्रमुख लॉजिस्टिक और कनेक्टिविटी हब के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस एयरपोर्ट को बड़े विमानों के संचालन के लिए तैयार किया जाए, जिसमें कार्गो सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। यह कदम राज्य के औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बेहतर कार्गो सुविधा से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना आसान हो जाएगा।

इस परियोजना का लाभ बिहार के 22 जिलों के अलावा झारखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों को भी मिलेगा। पहले चरण में 6500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ, यह एयरपोर्ट न केवल यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाएगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देगा। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 के तहत तेजी से पूरा करने का निर्णय लिया है।

विकास की गति और सरकार का संकल्प

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें ताकि परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हो सकें। राज्य सरकार इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और कनेक्टिविटी की लागत खुद वहन करेगी, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कितनी गंभीर है।

इन दोनों हवाई अड्डों के निर्माण से बिहार का एविएशन मैप पूरी तरह बदल जाएगा। पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में बिहार को एक बड़े कमर्शियल हब के रूप में स्थापित करेगी। अधिकारियों को नियमित अंतराल पर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्य में आ रही किसी भी बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।

इस समीक्षा बैठक में सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी सहित राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने इन परियोजनाओं के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर अपने सुझाव दिए। जैसे-जैसे इन हवाई अड्डों का निर्माण आगे बढ़ेगा, बिहार के लोगों को एक आधुनिक और सुगम परिवहन व्यवस्था का लाभ मिलेगा, जो राज्य के स्वर्णिम भविष्य की नींव साबित होगी।

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