केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘दानवीर’ पहल अब बिहार में पूरी तरह से रफ्तार पकड़ने के लिए तैयार है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को अपनी स्वेच्छा से पंचायतों और सामुदायिक पुस्तकालयों के लिए परिसंपत्तियां दान करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना की प्रगति और कार्यान्वयन को लेकर आज मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पंचायती राज मंत्रालय के निदेशक  विपुल उज्ज्वल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। इस बैठक में बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, ताकि इस पहल को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जा सके।

बिहार की ओर से पंचायती राज विभाग के निदेशक  नवीन कुमार सिंह ने इस दिशा में राज्य की रूपरेखा साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में इस पहल को एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए जल्द ही राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत सभी जिला पंचायत राज पदाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक नागरिकों और संस्थाओं को इस नेक काम से जोड़ सकें। श्री सिंह ने कहा कि बिहार के हर गांव में ऐसे कई उदार हृदय लोग हैं, जो सामुदायिक विकास के लिए अपना योगदान देना चाहते हैं, और यह पहल उन्हें एक पारदर्शी मंच प्रदान करेगी।

‘मेरी पंचायत पोर्टल’ के जरिए दान की प्रक्रिया हुई आसान

डिजिटल इंडिया के दौर में ‘दानवीर’ पहल को पूरी तरह से तकनीक से लैस किया गया है। शुरुआत में इस योजना को आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसकी सफलता के बाद अब इसका विस्तार अन्य राज्यों में किया जा रहा है। अब बिहार के नागरिक भी ‘मेरी पंचायत पोर्टल’ या इसके आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके आसानी से दान प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इस पोर्टल का उद्देश्य दान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और जवाबदेह बनाना है।

दान करने की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि दानदाता को पोर्टल पर जाकर अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार उपकरण या परिसंपत्ति का चयन करना होगा। दान दी गई वस्तुओं का ऑनलाइन पंजीकरण होगा और उन्हें संबंधित पंचायत के साथ मैप किया जाएगा। इसके बाद, दान की गई सामग्री के वितरण, स्थापना और उसके उपयोग की स्थिति को भी ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। यह पूरी प्रणाली डिजिटल रूप से संचालित होगी, जिससे किसी भी प्रकार के गबन या दुरुपयोग की संभावना खत्म हो जाएगी।

पारदर्शिता और डिजिटल मॉनिटरिंग है इस पहल की ताकत

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल निगरानी प्रणाली है। जब कोई नागरिक दान देता है, तो उसे एक विशिष्ट ‘डोनेशन आईडी’ प्रदान की जाती है। साथ ही, दान की गई हर परिसंपत्ति के लिए एक यूनिक ‘एसेट आईडी’ जनरेट की जाती है। पोर्टल पर दानदाता द्वारा दी गई सामग्री का पूरा विवरण जैसे कि मेक, मॉडल, स्पेसिफिकेशन, संख्या और दान की तारीख दर्ज की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दान की गई वस्तु सही जगह पहुँची है या नहीं और उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।

यह डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम न केवल दानदाताओं का भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि पंचायतों को भी संसाधनों के प्रबंधन में मदद करेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने पुस्तकालय के लिए किताबें या कंप्यूटर दान किए हैं, तो उसे यह जानने की सुविधा होगी कि उसके द्वारा दिए गए उपकरण का लाभ गांव के बच्चे उठा रहे हैं या नहीं। यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी संसाधनों पर निर्भरता को कम कर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देती है।

भविष्य की राह: सामुदायिक भागीदारी से सशक्त होगी पंचायत

ग्रामीण विकास के लिए केवल सरकारी फंड पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सामुदायिक सहयोग इसमें चार चांद लगा देता है। ‘दानवीर’ पहल इसी सामुदायिक सोच को एक संगठित स्वरूप देती है। बिहार सरकार का विशेष अभियान उन दानदाताओं को एक मंच देगा जो लंबे समय से समाज के लिए कुछ करना चाहते थे लेकिन सही माध्यम के अभाव में पीछे रह जाते थे। अब, कोई भी व्यक्ति अपनी पसंद की पंचायत को गोद ले सकता है या वहां पुस्तकालय के लिए जरूरी सामान दान कर सकता है।

आने वाले समय में, यह उम्मीद की जा रही है कि इस पहल के माध्यम से बिहार की हजारों ग्राम पंचायतें और पुस्तकालय आधुनिक संसाधनों से लैस हो जाएंगे। जिला स्तर पर होने वाले विशेष अभियान का उद्देश्य केवल दान एकत्र करना नहीं, बल्कि लोगों में ‘अपनी पंचायत, अपना विकास’ की भावना को जागृत करना भी है। यदि आप भी अपने गांव या किसी विशेष पंचायत में योगदान देना चाहते हैं, तो ‘मेरी पंचायत पोर्टल’ पर जाकर आज ही अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। यह न केवल एक दान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर शैक्षिक और सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश है।

Spread the love