बिहार के लौरिया विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, राहत और बचाव कार्यों में हो रही देरी को लेकर स्थानीय विधायक विनय बिहारी ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। मंगलवार को उन्होंने बेतिया कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। उनका यह कदम स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
लौरिया के विधायक विनय बिहारी का कहना है कि उनके क्षेत्र की जनता बाढ़ के कारण दाने-दाने को मोहताज है, लेकिन सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण उन तक पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों के बीच विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उदासीन है और पीड़ितों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद आकर स्थिति का अवलोकन नहीं करते, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल
मंगलवार का दिन बेतिया समाहरणालय परिसर में काफी गहमा-गहमी भरा रहा। विधायक विनय बिहारी ने पहले जिलाधिकारी तरनजोत सिंह से मिलने का प्रयास किया। उन्होंने अपनी व्यथा और क्षेत्र की स्थिति को साझा करने के लिए घंटों इंतजार किया, लेकिन शाम के पांच बजे तक जब उनकी मुलाकात नहीं हो सकी, तो उन्होंने कलेक्ट्रेट के पोर्टिको में ही अपना गमछा बिछाया और धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि एक जन प्रतिनिधि के तौर पर उनके पास जनता की आवाज बुलंद करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था।
विधायक ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने पूरे लौरिया विधानसभा क्षेत्र को ‘बाढ़ प्रभावित’ घोषित करने की मांग की है। उनके अनुसार, लौरिया और योगापट्टी प्रखंडों की एक बड़ी आबादी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है। उन्होंने बताया कि लौरिया अंचल की लगभग 70 प्रतिशत से अधिक खेती योग्य भूमि पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी है, जिससे किसानों की कमर टूट गई है। फसलें बर्बाद हो गई हैं और आने वाले समय में भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है।
राहत कार्यों में तेजी लाने की मांग
विनय बिहारी ने भवानीपुर तटबंध की बदहाल स्थिति पर भी गहरा चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते तटबंध की मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। विधायक ने सरकार से आग्रह किया है कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को हेलीकॉप्टर के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करना चाहिए ताकि जमीनी हकीकत का पता चल सके। उन्होंने कहा कि फाइलों में चल रहे राहत कार्य और धरातल पर हो रहे काम के बीच बहुत बड़ा अंतर है, जिसे पाटने की सख्त जरूरत है।
अपनी मांगों की सूची में विधायक ने योगापट्टी में नावों की संख्या बढ़ाने, सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) शुरू करने और पशुचारे की पर्याप्त व्यवस्था करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि बाढ़ में फंसे लोगों को केवल सूखा राशन ही नहीं, बल्कि पका हुआ भोजन और स्वच्छ पेयजल भी तत्काल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। साथ ही, बाढ़ के कारण ढह चुके मकानों के लिए मिलने वाली मुआवजा राशि को बढ़ाने और सड़कों व पुल-पुलियों की मरम्मत को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
पशुपालकों और किसानों के नुकसान की भरपाई
बाढ़ में केवल इंसानी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि पशुधन को भी भारी क्षति पहुंची है। विधायक ने मांग की है कि पशुपालकों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई गांवों में पशु चारा पूरी तरह से गल चुका है, जिससे मवेशियों की जान बचाना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन को तुरंत प्रभाव से पशु चिकित्सा शिविर लगाने चाहिए ताकि बीमार हो रहे मवेशियों का इलाज हो सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जहां एक तरफ विपक्ष बाढ़ राहत में लापरवाही के आरोप लगा रहा था, वहीं अब सत्ताधारी दल के विधायक का ही धरने पर बैठना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर स्थिति कितनी गंभीर है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार विनय बिहारी की इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और लौरिया की जनता को कब तक राहत की सांस नसीब होती है। फिलहाल, कलेक्ट्रेट परिसर में विधायक का धरना चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

