16 जनवरी 2026, बेतिया. स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की तैयारी में बिहार सरकार जुट गयी है।  गांव से जिला तक  इलाज का ढांचा बदलने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आज से समृद्धि यात्रा की शुरूआत हो गयी है। इस यात्रा में ही मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में किये जानेवाले कई बदलावों की घोषणा की है।

सात निश्चय पार्ट-3 में बड़ा फैसला

राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने पहली बार यह साफ कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगेगी।  यह फैसला सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ का हिस्सा होगा। सरकार का मानना है कि प्राइवेट प्रैक्टिस पर बैन से डॉक्टर अस्पताल में पूरा समय देंगे और यहां आनेवाले गरीब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक भरोसा लौटाने और सरकारी अस्पतालों की कार्यसंस्कृति सुधारने के लिए उठाया जा रहा है। 

सरकारी डॉक्टर करते हैं प्राइवेट प्रैक्टिस

लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई डॉक्टर अस्पताल की ड्यूटी के बाद या दौरान निजी क्लिनिक में ज्यादा समय देते हैं जिससे मरीजों का इंतजार अधिक होता है।  सात निश्चय -3 में पांचवें निश्चय के रूप में सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन का संकल्प शामिल है। इसके मुख्य बिंदुओं में सरकार ने सुदूर गांवों में जाकर सेवा करनेवाले चिकित्सकों के लिए बड़ी घोषणा की है।

गांवों में काम करनेवाले होंगे प्रोत्साहित

 सरकार ने कहा है कि दूर के गांवों में जाकर बेहतर इलाज सेवा करनेवाले डॉक्टरों को वेतन के अलावा अलग से प्रोत्साहन की व्यवस्था करेगी।  सरकार के 2025-25 के कार्यक्रमों में कहा गया है कि प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (स्पेसलिटी हॉस्पिटल ) के रूप में विकसित करेगी। यह माना जा रहा है कि इन अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर कुछ विशेषज्ञों की तैनाती होगी और इलाज की बेहतर व्यवस्था कायम होगी। जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र (सुपर स्पेसलिटी हॉस्पिटल) के रूप में विकसित करेगी।

जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ इलाज

 जिला अस्पतालों में खास प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए अब मेडिकल कॉलेजों पर निर्भरता कम होगी. सात निश्चय में सरकार की सबसे बड़ी पहल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को लेकर की गयी है. सरकार राज्य में नये मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बेहतर पढ़ाई और इलाज के लिए लोक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) को प्रोत्साहित करेगी. वर्तमान में राज्य में 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल सरकार द्वारा संचालित किये जा रहे हैं.  इसके अलावा राज्य के हर जिलों में नये मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी की जानी है।  ऐसे में नये मेडिकल कॉलेज अस्पताल खोलने के लिए सरकार ने एक बड़ा दरवाजा प्राइवेट प्लेयर के लिए खोल दिया है।  इतना ही नहीं सरकार ने जितने भी निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित अस्पताल हैं उनको भी राज्य में अस्पताल खोलने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करेंगी. 
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