पटना। ईरान पर अमेरिका और इसराइल की संयुक्त हमले से पूरे अरब जगत में आशंकाओं के बीच लोगों का जीवन गुजर रहा है। युद्ध भूमि से हजारो किलोमीटर दूर बिहार में भी लोगों की चिंता फैली हुई है। वह चिंता है अपने लोगों को लेकर। बिहार के लोगों को इससे कोई मतलब नहीं है कि उनके परिवार के लोग किसी शिया देश में काम कर रहे हैं या सुन्नी देश में। बिहार से जानेवाले कौन शिया हैं, कौन सुन्नी है और कौन अहमदिया है? सबकी नजर और प्राथमिकता यह है कि बिहारी जहां भी रहकर काम कर रहे हैं वे सुरक्षित हों।

70 हजार से अधिक करते हैं इरान सहित अरब देशों में काम

एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान सहित अरब देशों में बिहार के करीब 70 हजार लोग काम करते हैं. इसमें कुछ हाइ प्रोफेशनल है तो कुछ कामगार हैं। बिहार के सबसे अधिक 20 जिलों के लोग अरब देशों में जाकर काम करते हैं। ईरान में बिहारियों की वास्तविक संख्या के भरोसेमंद आंकड़े तो नहीं हैं, पर जो अभी आंकड़े उपलब्ध हैं, उनके अनुसार सऊदी अरब (यूएइ) में बिहारियों की संख्या 29 हजार से अधिक है जबकि सऊदी अरब में 28 हजार से अधिक बिहार काम करते हैं। कतर जैसे छोटे देश में भी पांच हजार से अधिक बिहारी काम कर रहे हैं, तो ओमान में तीन हजार से अधिक और बहरीन में करीब दो हजार लोग काम करते हैं। इसके अलावा कुवैत, जॉर्डन, इराक जैसे अन्य देशों में भी अपेक्षाकृत कम लोग काम करते हैं।

बिहार के किन जिलों से बाहर जाते हैं लोग

यह जानकार आश्चर्य होगा कि बिहार के 20 ऐसे जिले हैं जहां से इरान सहित अरब देशों में जाकर लोग काम करते हैं। इसमें गोपालगंज जिला हैं जहां पर उद्योगों के नहीं रहने से भारी संख्या में लोग बिहार छोड़कर बाहर कमाने जाते हैं। सीवान जिले में लंबे समय से काम ढूंढने के लिए अरब देशों में लोग जाते रहे हैं। सारण जिला में सिर्फ खेती होने के कारण लोग घर के लिए बाहहरी आमदनी के लिए इन देशों में काम करने के लिए जाते हैं। मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया (सीमांचल), दरभंगा, अररिया (सीमांचल), वैशाली, सुपौल, भागलपुर, भोजपुर, नालंदा, रोहतास, गया, नवादा, भभुआ जैसे जिलों के लोग भी विदेशों में जाकर रोजगार करते हैं।

बिहार सरकार की क्या है योजना

बिहार सरकार की ओर से विदेशों में जाकर काम करनेवाले श्रमिकों के लिए बिहार प्रवासी मजदूर के तहत निबंधन किया जाता है। इसके तहत बिहार से बाहर किसी भी दूसरे देश में काम करनेवाले, खासकर अरब देशों में जानेवाले सभी प्रकार के प्रवासी मजदूरों का निबंधन किया जाता। ऐसे में अरब में काम करनेवाले हर बिहारी का आंकड़ा सरकार के पास उपलब्ध है। किसी भी देश में बिहार के लोगों के साथ किसी तरह की घटना होती है तो मजदूरों के निधन होने के बाद सरकार अपने खर्च पर उनके शवों को वहां से बिहार में मृतक के घर तक पहुंचाती है। इतना ही नहीं दुर्घटना बीमा के तहत आश्रितों को सहायता भी दी जाती है। बिहार सरकार भारत सरकार के माध्यम से ईरान सहित अरब देशों में हो रहे युद्ध पर नजर रखे हुए है। कहीं से अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

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