14 जनवरी 2026. पटना : बिहार में पंचायत चुनावों को लेकर अभी तक कई प्रकार के प्रयोग हो चुके हैं। बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स से मतदान कराना और दो-तीन दिनों की मतगणना होना। अब उस दौर से पंचायत चुनाव आगे निकल चुका है। नये दौर में 2026 के पंचायत चुनाव  की तैयारी है।  अभी से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले पंचायत चुनावों में नयी तकनीकी  व सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया है। इस बार होनेवाले चुनाव  में सबसे बड़ा बदलाव मतदान को लेकर हो रहा है। पहली बार बिहार के पंचायत चुनाव में मल्टीपोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल होगा।

अभी तक किये गये तकनीकी व सॉफ्टवेयर का प्रयोग

बिहार के पंचायत चुनाव देश में नजीर बन चुका है। चुनाव को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है। इसमें बायोमेट्रिक फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफ.आर.एस) के जरिये मतदाता का सत्यापन करना, ईवीएम से मतदान कराना, बज्रगृह में रखे गये ईवीएम और बूथों की वेबकास्टिंग के माध्यम से लाइव मॉनिटरिंग करना, बज्रगृह में डिजिटल लॉक व्यवस्था करना, ओसीआर (ऑप्टिकल करेक्टर रिकॉग्निशन ) से मतगणना कराना, जीआइ मैपिंग और ई-वोटिंग का प्रयोग (नगरपालिका उप चुनाव में) किया जा चुका है।

बायोमेट्रिक एफआरएस क्या है?

फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के जरिये मतदाता का सत्यापन किया जाता है। यह एक आधुनिक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता की पहचान उसके चेहरे के आधार पर की जाती है। इस प्रणाली में मतदाता का चेहरा कैमरे से स्कैन किया जाता है और उसे पहले से उपब्ध मतदाता सूची से मिलान किया जाता है।

इस तकनीकी का प्रयोग चुनाव के दिन किया जाता है। जब कोई मतदाता चुनाव के दिन बूथ पर पहुंचता है, तो उसका चेहरा लाइव कैमरे के सामने आता है। सिस्टम यह जांच करता है कि यह वोटर वहीं है या नहीं, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। अगर चेहरा मेल खा जाता है, तो वोटर को वोट डालने की अनुमति मिल जाती है।

इस तकनीका का उद्देश्य फर्जी मतदान, एक व्यक्ति द्वारा कई बार वोट डालने और पहचान में गड़बड़ी को रोकता है। साथ ही, इससे मतदान की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनाती है। हालांकि, इसके इस्तेमाल में डाटा सुरक्षा और निजता जैसे मुद्दों पर सावधान बरतने की भी जरूरत है।

ओसीआर तकनीक से कैसे होती है मतगणना?

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकोग्निशन (ओसीआर) तकनीकी के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना का प्रयोग पिछले चुनावों में किया है। ओसीआर आधारित मतगणना एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें मतपत्र या गणना शीट पर छपे या लिखें अंकों या चिह्नों को मशीन अपने आप पढ़कर डिजिटल डाटा में बदल देती है। इसका उपयोग खासतौर बैलेट पेपर या पोस्ट बैलेट और फार्म आधारित मतगणना में किया जाता है।

इसमें इवीएम मशीन को सबसे पहले हाई -रिजोल्यूशन स्कैनर से स्कैन किया जाता है। स्कैन की गयी इमेज को ओसीआर सॉफ्टवेयर पढ़ता है और यह पहचान करता है कि किस उम्मीदवार के सामने कौन सा चिह्न, संख्या या मुहर लगी है। इसके बाद यह जानकारी कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाती है और खुद वोटिंग की गिनती शुरू हो जाती है।

मल्टीपोस्ट ईवीएम से इस बार का मतदान

पंचायत चुनाव 2026 का मतदान मल्टी पोस्ट ईवीएम से कराया जायेगा। इस इवीएम मशीन में मतदाता को अलग-अलग इवीएम के पास जाकर मतदान करने की जरूरत नहीं होगी। मल्टी पोस्ट ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट होगा जिससे छह विभिन्न पदों के प्रत्याशियों के नाम वाले बैलेट यूनिट होगा. सभी पदों जिसमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए मतदान होगा। इन पदों के लिए हुए मतदान एक कंट्रोल यूनिट में संग्रहित होगा। इससे मतगणना आसानी से होगा।

 

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