बिहार में पंचायत चुनाव 2026 में होनेवाला है। इसके साथ ही ग्राम कचहरियों का भी चुनाव होगा। अभी चुनावी प्रक्रिया आरंभ भी नहीं हुई की चुनाव के पहले त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की मांग उठने लगी है। मांग है कि ग्राम पंचायतों का परिसीमन किया जाये। मांग को लेकर मुखिया महासंघ अधिक मुखर है। संघ ने सरकार को चेतावनी तक दे डाली है कि परिसीमन नहीं होने पर आंदोलन होगा। चुनाव के पहले मुखिया इस मांग को लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
क्या है ग्राम पंचायतों का परिसीमन?
बिहार में ग्राम पंचायतों का आकार बढ़ते जाने से हर ग्राम पंचायत की सीमाओं का विस्तार हुआ है। ऐसे में बिहार में हर ग्राम पंचायतों में एक समान आबादी नहीं है। किसी ग्राम पंचायत में आबादी 20-25 हजार हो गयी है तो कुछ ग्राम पंचायत की आबादी अभी छह-आठ हजार के बीच है। ऐसे में पंचायतों की आबादी को एक समान बनाने के लिए यह आवश्यक हो गया है।
क्यों मुखिया महासंघ परिसीमन पर अड़ा है?
प्रदेश मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय का कहना है कि बिहार में वर्ष 2001 में साल 1991 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन कराया गया था। वर्ष 1919 की जनगणना के बाद बिहार के हर ग्राम पंचायत की आबादी बढ़कर करीब ढ़ाई गुणी हो गयी है. उन्होंने यह भी बताया कि बिहार के कई जिलों और प्रंखड़ों में कुछ पंचायतों का क्षेत्रफल 10 किलोमीटर से अधिक में फैला हुई है। ऐसे में ग्राम पंचायत मुख्यालय में पहुंचने में वहां की जनता को लंबी दूर तय करना पड़ता है. मुख्यालय में ही मुखिया सहित अन्य कर्मचारी रहते हैं। इससे प्रशासनिक अव्यवस्था भी पैदा हो रही है।
नगर निकायों के गठन ने भी बढ़ायी है समस्या
बिहार में पंचायत आम चुनाव 2021 के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से राज्य में बड़ी संख्या में पंचायतों को शामिल करते हुए नये नगर पंचायतों का गठन किया गया। इसके अलावा कई नगर पंचायतों का उत्क्रमण (क्षेत्र विस्तार) करते हुए उनको नगर परिषद बनाया गया। नगर पंचायतों के उत्क्रमण के दौरान राज्य की कई ग्राम पंचायतों का या तो क्षेत्रफल कट गया या पूरी तरह से नगर निकायों में विलीन कर दिया गया। साथ ही नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निगम क्षेत्रों का भी विस्तार किया जिससे पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
परिसीमन से जनता को मिलेगा लाभ
वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर गठित पंचायतों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा राशि आवंटित की जाती है। वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारों के पास ग्राम पंचायतों की वास्तिविक आबादी का कोई आंकड़ा ही नहीं है। ऐसे में जो भी ग्राम पंचायतों को आवंटन मिलता है, वह पुराने आंकड़ों पर आधारित है। मुखिया महासंघ का कहना है कि जिन ग्राम पंचायतों का विलय नगर निकायों में हो गया वहां पर वर्तमान में भी वहीं राशि आवंटित की जाती है जो पूर्व में उस ग्राम पंचायत की आबादी थी। दूसरी ओर जहां की जनसंख्या बढ़ गयी है उनको निर्धारित राशि में ही विस्तार वाले क्षेत्र में भी विकास का कार्य किया जाना है। सरकार अगर ग्राम पंचायतों का परिसीमन करती है तो प्रशासनिक लाभ के साथ ही पंचायतों के विकास के लिए आवंटित राशि का उपयोग तार्किक रूप से किया जा सकेगा.

