पटना: बिहार सरकार ने ग्रेटर पटना के विकास को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में बिहार राज्य आवास बोर्ड सीधे भू-स्वामियों (रैयतों) से जमीन खरीद सकेगा। इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने जमीन खरीद और निबंधन की पूरी प्रक्रिया तय कर दी है।

सरकार का उद्देश्य राजधानी पटना के आसपास आधुनिक आवासीय क्षेत्रों और बेहतर शहरी सुविधाओं का विकास करना है। नई व्यवस्था के तहत भूमि अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की व्यवस्था की गई है, जिससे परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

क्या होगी जमीन खरीद की प्रक्रिया?

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि कोई भू-स्वामी अपनी जमीन बेचना चाहता है तो उसे बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक को प्रस्ताव और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। इसके बाद आवास बोर्ड सात दिनों के भीतर प्रस्ताव की प्राथमिक जांच करेगा।

जमीन का मूल्य निर्धारण बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 के तहत किया जाएगा। यदि प्रस्तावित जमीन की अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये तक होगी तो संबंधित प्रमंडलीय आयुक्त स्तर पर कार्रवाई होगी, जबकि 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली जमीन के मामलों को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।

समिति करेगी मूल्यांकन

जिला या प्रमंडल स्तर पर गठित रैयती भूमि क्रय समिति जमीन की दर, कुल मूल्य और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद भू-स्वामी की अंतिम सहमति प्राप्त कर प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकारी के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

स्वीकृति मिलने के बाद बिहार राज्य आवास बोर्ड सात दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करेगा और अधिकृत अधिकारी के माध्यम से जमीन की रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसके साथ ही जमीन का नामांतरण भी आवास बोर्ड के पक्ष में कराया जाएगा।

स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क से मिलेगी छूट

सरकार ने इस प्रक्रिया के तहत खरीदी जाने वाली जमीन को स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क से मुक्त रखने का निर्णय लिया है। इससे जमीन खरीद की लागत कम होगी और विकास परियोजनाओं को तेजी मिलेगी।

ग्रेटर पटना परियोजना को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्रेटर पटना और सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में आसानी होगी। आने वाले वर्षों में राजधानी के आसपास नए आवासीय क्षेत्र, सड़कें, पार्क, स्कूल और अन्य शहरी सुविधाएं विकसित करने की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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