पटना: बिहार के गांवों में विकास योजनाओं को लोगों तक सीधे पहुंचाने और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। पंचायती राज विभाग ने फैसला लिया है कि अब राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में हर महीने “पंचायत विकास दिवस” आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान पंचायत प्रतिनिधि ग्रामीणों के सामने विकास योजनाओं, खर्च, सरकारी पोर्टलों पर दर्ज कामों और अगले महीने की कार्ययोजना की जानकारी साझा करेंगे।
सरकार का उद्देश्य गांवों के लोगों को पंचायत के कामकाज से सीधे जोड़ना और विकास योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाना है। इसके लिए प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पंचायत स्तर पर बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आम ग्रामीण भी भाग ले सकेंगे।
बैठक में क्या-क्या होगा?
जारी कार्यसूची के अनुसार पंचायत विकास दिवस की बैठक केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगी, बल्कि गांव के विकास का सार्वजनिक मंच बनेगी। बैठक की शुरुआत पंचायत अध्यक्ष के संबोधन से होगी। इसमें ग्रामीणों को राष्ट्रीय, राज्य, जिला और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण संदेशों की जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद पिछली बैठक में लिए गए फैसलों और उनके अनुपालन की स्थिति बताई जाएगी ताकि लोग जान सकें कि जो निर्णय हुए थे, उन पर कितना काम हुआ।
बैठक में e-Gram Swaraj Portal, e-Panchayat और अन्य सरकारी पोर्टलों पर दर्ज विकास योजनाओं की स्थिति भी सार्वजनिक की जाएगी। इससे ग्रामीण सीधे जान सकेंगे कि उनके पंचायत क्षेत्र में कौन-कौन सी योजनाएं चल रही हैं और उनकी प्रगति क्या है।
खर्च और आय का भी देना होगा हिसाब
पंचायत विकास दिवस की सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि पंचायत को मिले फंड और उसके उपयोग की जानकारी भी लोगों के सामने रखी जाएगी। बैठक में बताया जाएगा कि पंचायत को किन स्रोतों से राशि मिली, कितना खर्च हुआ और कितनी राशि शेष है। साथ ही पिछले महीने विकास कार्यों पर हुए खर्च का भी ब्यौरा ग्रामीणों को दिया जाएगा।
इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में वर्तमान में चल रही योजनाओं और अगले महीने शुरू होने वाली योजनाओं की भी जानकारी साझा की जाएगी, ताकि लोग समय रहते अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि पंचायतों का विकास तभी संभव है जब गांव के लोग निर्णय प्रक्रिया में शामिल हों। पंचायत विकास दिवस के जरिए ग्रामीणों को न केवल जानकारी मिलेगी बल्कि उन्हें सवाल पूछने और सुझाव देने का अवसर भी मिलेगा। इससे योजनाओं की निगरानी मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी।
ग्रामीण विकास और पारदर्शी पंचायत व्यवस्था की दिशा में यह पहल आने वाले समय में बिहार के गांवों की तस्वीर बदलने का माध्यम बन सकती है।

