बिहार में हवा की सेहत में सुधार, लेकिन पटना-गया-मुजफ्फरपुर अब भी चिंता की वजह
पटना | 7 सितंबर 2026
बिहार में वायु प्रदूषण को कम करने की कोशिशों का असर अब दिखाई देने लगा है। राज्य में हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन पटना, गया और मुजफ्फरपुर अभी भी ऐसे शहर हैं जहां प्रदूषण निर्धारित सीमा से अधिक है। इन शहरों को नॉन-अटेनमेंट सिटी की श्रेणी में रखा गया है। यह जानकारी बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के वैज्ञानिक सलाहकार एस.एन. जायसवाल ने स्वच्छ वायु दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दी।
PM10 और PM2.5 में बड़ी कमी
एस.एन. जायसवाल ने बताया कि बिहार में वायु प्रदूषण की निगरानी और उसे कम करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर प्रदूषण के आंकड़ों में भी दिख रहा है।
उनके मुताबिक, 2022-23 के मुकाबले 2025-26 में PM10 की मात्रा में 55 प्रतिशत और PM2.5 की मात्रा में 52 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। राज्य के लगभग सभी शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI में भी सुधार हुआ है।
यहां PM10 और PM2.5 का मतलब हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषणकारी कणों से है। इन कणों की मात्रा बढ़ने पर हवा की गुणवत्ता खराब मानी जाती है।
क्या होता है पीएम 10 और पीएम 2.5
बिल्कुल आसान भाषा में:
- PM10 = हवा में मौजूद बहुत छोटे धूल और प्रदूषण के कण, जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये धूल, सड़क की मिट्टी, निर्माण कार्य और वाहनों के धुएं से हवा में आ सकते हैं।
- PM2.5 = इससे भी बहुत बारीक प्रदूषण के कण, जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये खासकर वाहनों, उद्योगों, ईंधन जलाने और धुएं से पैदा होते हैं।
“PM10 और PM2.5 हवा में मौजूद बेहद बारीक धूल और धुएं के कण होते हैं, जो ज्यादा मात्रा में होने पर हवा को प्रदूषित करते हैं।”
“एस.एन. जायसवाल के मुताबिक, 2022-23 की तुलना में 2025-26 में हवा में मौजूद बारीक धूल और धुएं के कण PM10 में 55 फीसदी और PM2.5 में 52 फीसदी की कमी आई है।”
34 जगहों पर लगातार हवा की जांच
वैज्ञानिक सलाहकार एस.एन. जायसवाल ने बताया कि राज्य में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए 34 अनवरत परिवेशीय वायु गुणवत्ता प्रबोधन केंद्र काम कर रहे हैं। इसके अलावा 16 और केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों में हवा की स्थिति की निगरानी और बेहतर होने की उम्मीद है।
पुराने वाहनों और उद्योगों पर भी नजर
वायु प्रदूषण कम करने के लिए सरकार और संबंधित विभागों की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इनमें वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम करना, 15 साल पुराने वाहनों पर रोक, CNG वाहनों को बढ़ावा देना और उद्योगों में प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों के इस्तेमाल को नियंत्रित करना शामिल है।
इसके साथ ही उद्योगों में कोयला, फर्नेस ऑयल और लकड़ी के इस्तेमाल को रोकने, PNG नेटवर्क को बढ़ाने और ईंट-भट्ठों में अपेक्षाकृत स्वच्छ तकनीक अपनाने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
सिर्फ सरकार नहीं, आम लोगों की भी जिम्मेदारी
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साफ हवा के लिए सरकार के साथ आम लोगों की भागीदारी पर भी जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि वायु प्रदूषण किसी एक शहर या विभाग की समस्या नहीं है। इसे कम करने के लिए सरकार, विशेषज्ञों, विभागों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के सदस्य-सचिव नीरज नारायण ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और पानी सुनिश्चित करने के लिए सरकार से जुड़े विभागों और आम लोगों को एक मंच पर लाना जरूरी है।
स्वच्छ हवा के लिए पूरे क्षेत्र को साथ लेकर चलने की जरूरत
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि हवा का प्रदूषण किसी प्रशासनिक सीमा तक सीमित नहीं रहता। एक इलाके में पैदा हुआ प्रदूषण आसपास के क्षेत्रों की हवा को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए बिहार के साथ पूरे इंडो-गैंगेटिक प्लेन (IGP) में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
हरित विद्यालय प्रतियोगिता में स्कूल सम्मानित
स्वच्छ वायु दिवस के मौके पर हरित विद्यालय प्रतियोगिता-2026 के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहतर काम करने वाले स्कूलों को भी सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता में दिल्ली पब्लिक स्कूल, चौधरी, दानापुर कैंट, पटना को पहला, विद्या बिहार रेजिडेंशियल स्कूल, पूर्णिया को दूसरा और आर्मी पब्लिक स्कूल, दानापुर कैंट, पटना को तीसरा स्थान मिला। तीन अन्य स्कूलों को ‘सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट’ दिया गया।
कुल मिलाकर, बिहार में हवा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों से PM10 और PM2.5 में उल्लेखनीय कमी आई है। लेकिन पटना, गया और मुजफ्फरपुर में प्रदूषण अभी भी निर्धारित स्तर से ऊपर है। ऐसे में निगरानी केंद्रों का विस्तार और वाहनों, उद्योगों व अन्य प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती रहेगी।

