पटना: बिहार सरकार ने राज्य की सड़कों, एक्सप्रेस-वे, पुलों और अन्य सड़कों  पर उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल वसूली के लिए नई “बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दर का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026” लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस नई नियमावली में जहां टोल संग्रहण को आधुनिक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया है, वहीं कई श्रेणियों के वाहनों और व्यक्तियों को टोल शुल्क से छूट देने का भी प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि नियमावली के  प्रावधानों में टोल शुल्क में छूट और विशेष रियायतों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे कई वर्गों को सीधा लाभ मिलेगा।

वीवीआईपी वाहनों को पूरी तरह टोल से छूट

नियमावली के अध्याय-11 में स्पष्ट किया गया है कि कुछ संवैधानिक पदाधिकारियों के वाहनों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इनमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों के वाहन शामिल हैं। इन वाहनों के लिए किसी भी राज्य सड़क, पुल या टोल प्लाजा पर शुल्क देय नहीं होगा।

इसके अलावा बाद के प्रावधानों में कई अन्य संवैधानिक और प्रशासनिक पदाधिकारियों के वाहनों को भी छूट सूची में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी और संवैधानिक कार्यों में बाधा नहीं आने देना है।

स्थानीय यात्रियों के लिए पास सुविधा

नई नियमावली में सबसे बड़ी राहत नियमित रूप से एक ही टोल प्लाजा से गुजरने वाले स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों को दी गई है। नियमों के अनुसार, वाहन मालिक निर्धारित शुल्क जमा कर विशेष पास प्राप्त कर सकेंगे, जिसके जरिए उन्हें बार-बार पूरा टोल भुगतान नहीं करना होगा।

नियमावली के अनुसार एकल यात्रा शुल्क का डेढ़ गुना भुगतान कर वाहन चालक 24 घंटे के भीतर दो यात्राएं कर सकेगा। इसी प्रकार 50 एकल यात्राओं के लिए निर्धारित शुल्क का केवल दो-तिहाई हिस्सा देकर मासिक पास लिया जा सकेगा, जिसकी वैधता एक महीने तक होगी। इससे रोजाना आवागमन करने वाले लोगों के खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी।

निजी गैर-व्यावसायिक वाहनों को विशेष रियायत

नियमावली में गैर-व्यावसायिक उपयोग वाले पंजीकृत निजी वाहनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। ऐसे वाहन मालिक वार्षिक आधार पर पास प्राप्त कर सकेंगे। इसके तहत एक बार शुल्क जमा करने के बाद वाहन चालक राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी भी परियोजना मार्ग या टोल प्लाजा से निर्धारित अवधि तक गुजर सकेंगे।

यह प्रावधान उन लोगों के लिए काफी राहतभरा साबित होगा जो प्रतिदिन कार्यालय, व्यवसाय या शिक्षा के लिए एक ही मार्ग का उपयोग करते हैं।

फास्टैग धारकों को अतिरिक्त लाभ

बिहार सरकार ने नई नियमावली में इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रहण प्रणाली और फास्टैग के उपयोग को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही फास्टैग का उपयोग करने वालों को अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ भी मिलेगा। बिना फास्टैग या निष्क्रिय फास्टैग वाले वाहनों से दोगुना शुल्क वसूला जाएगा, जबकि सक्रिय फास्टैग उपयोगकर्ता सामान्य शुल्क का ही भुगतान करेंगे।

यानी फास्टैग उपयोग करने वाले वाहन चालकों को अतिरिक्त शुल्क से बचने का लाभ मिलेगा और टोल प्लाजा पर समय की भी बचत होगी।

किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को राहत

नियमावली में पहले से मौजूद व्यवस्था को जारी रखते हुए कृषि उपयोग से जुड़े कई प्रकार के वाहनों और मशीनों को राहत देने का प्रावधान रखा गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किए बिना सड़क अवसंरचना के लिए संसाधन जुटाने का संतुलन बनाने की कोशिश इस नियमावली में दिखाई देती है।

वैकल्पिक सड़क उपलब्ध होने पर ही वसूला जाएगा शुल्क

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन मार्गों पर वैकल्पिक सड़क उपलब्ध नहीं होगी, वहां विशेष श्रेणी के वाहनों पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यदि समानांतर सर्विस रोड या वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध है, तभी कुछ श्रेणियों के वाहनों पर शुल्क लागू होगा। यह प्रावधान ग्रामीण और स्थानीय आबादी को राहत देने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।

ओवरलोड वाहनों पर सख्ती, लेकिन सामान्य वाहन चालकों को राहत

नई नियमावली में सामान्य वाहन चालकों के लिए रियायतों का दायरा बढ़ाया गया है, लेकिन ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। निर्धारित वजन सीमा से 10 प्रतिशत तक अधिक भार वाले वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन इसके बाद अतिरिक्त भार के अनुसार दो से चार गुना तक शुल्क वसूला जाएगा।

इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और सड़कों की उम्र बढ़ाना है।

डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था पर जोर

नई टोल नीति का एक प्रमुख उद्देश्य नकद लेनदेन को कम करना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। फास्टैग, इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और ऑटोमेटेड टोल संग्रहण के जरिए भ्रष्टाचार और विवाद की संभावनाओं को कम करने की कोशिश की गई है। सरकार का मानना है कि इससे यात्रा समय घटेगा और यातायात प्रबंधन बेहतर होगा।

क्या होगा आम लोगों पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि नई नियमावली में एक ओर जहां सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए संसाधन जुटाने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी ओर दैनिक यात्रियों, स्थानीय निवासियों और नियमित वाहन उपयोगकर्ताओं को राहत देने वाले प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। मासिक पास, वार्षिक पास और फास्टैग आधारित छूट से लाखों वाहन चालकों को फायदा हो सकता है।

हालांकि, नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और छूट की श्रेणियों के स्पष्ट निर्धारण के बाद ही यह तय हो सकेगा कि इसका वास्तविक लाभ किन वर्गों तक पहुंचता है। फिलहाल इतना तय है कि नई टोल नियमावली  में दिए गए शुल्क छूट के प्रावधान आम यात्रियों और नियमित वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की बड़ी खबर लेकर आए।

Spread the love