मेडिकल संस्थानों के रजिस्ट्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव

पटना: बिहार सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए निजी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग ने बिहार नैदानिक स्थापना (रजिस्ट्रेशन और विनियमन) नियमावली, 2013 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके बाद मेडिकल संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और डिजिटल हो जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी नैदानिक संस्थानों, विशेषकर 1 से 40 बेड तक वाले अस्पतालों, क्लिनिकों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण और नवीकरण की सुविधा मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे संस्थानों को कई स्तर की प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलेगी और अनुमति लेने में लगने वाला समय कम होगा।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केंद्र सरकार की डीरिग्युलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन (फेज-2) पहल के अनुरूप यह बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत मेडिकल प्रैक्टिशनर रजिस्ट्रेशन और एनओसी प्रक्रिया को राज्यों में आसान बनाने पर जोर दिया गया है।

सिंगल नोडल एजेंसी के जरिए होगी प्रक्रिया

संशोधित व्यवस्था में चिकित्सा संस्थानों को अलग-अलग कार्यालयों में आवेदन देने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार सिंगल नोडल एजेंसी के डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आवेदन, जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया संचालित करने की तैयारी कर रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ने और प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद जतायी जा रही है।

एक संस्थान के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं

नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई चिकित्सा संस्थान एक बार संबंधित नियमावली के तहत पंजीकृत हो जाता है तो उसे समान प्रकृति की सेवाओं के लिए अलग-अलग स्तर पर दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे छोटे और मध्यम स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

स्वास्थ्य निवेश को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने और नई चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। डिजिटल और केंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने से संस्थानों के संचालन में आसानी होगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

स्वास्थ्य विभाग इस संशोधन को बिहार नैदानिक स्थापना (रजिस्ट्रेशन और विनियमन) संशोधन नियमावली, 2026 के रूप में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

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