पटना: बिहार सरकार द्वारा त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतों के परिसीमन (चुनाव क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण) का निर्णय लिए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल स्पष्ट हो गया है कि यह कार्य कौन कराएगा। बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 के अनुसार पंचायतों के चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में कराया जाएगा। आयोग यह कार्य सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों (डीएम) के माध्यम से संपन्न कराएगा।

कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद अब परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की तैयारी है। इसके लागू होने के बाद राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी नक्शा पूरी तरह बदल सकता है। कई पंचायतों में चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं बदलेंगी और जनसंख्या के आधार पर वार्डों एवं अन्य निर्वाचित पदों की संख्या में भी वृद्धि होने की संभावना है।

वर्ष 2011 की जनगणना बनेगी आधार

राज्य सरकार ने पंचायतों के चुनाव क्षेत्रों के गठन और पुनर्गठन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाने का निर्णय लिया है। इसी जनसंख्या के अनुसार नए चुनाव क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा।

किन-किन पदों का होगा परिसीमन

परिसीमन के दौरान केवल त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ग्राम कचहरी के चुनाव क्षेत्रों का भी पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसके तहत निम्न पदों के निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया जाएगा—

  • प्रति 500 की आबादी पर एक वार्ड सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र।
  • लगभग 5,000 की आबादी पर एक ग्राम पंचायत (मुखिया) का निर्वाचन क्षेत्र।
  • लगभग 5,000 की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र।
  • लगभग 50,000 की आबादी पर एक जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र।

राज्य निर्वाचन आयोग की होगी प्रमुख भूमिका

बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली, 2006 की धारा-3 के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद तथा ग्राम कचहरी के चुनाव क्षेत्रों का गठन राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन, नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण में जिला दंडाधिकारी करेंगे। यह कार्य बिहार पंचायत राज अधिनियम की संबंधित धाराओं के अनुरूप किया जाएगा।

नियमावली के अनुसार प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में सटे हुए (Contiguous) क्षेत्र शामिल होंगे। साथ ही चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं इस प्रकार निर्धारित की जाएंगी कि उनकी पहचान प्राकृतिक अथवा कृत्रिम सीमाओं के आधार पर स्पष्ट रूप से की जा सके।

अभी पूरे होने हैं कई महत्वपूर्ण चरण

हालांकि कैबिनेट से निर्णय हो जाने के बावजूद परिसीमन की प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं होगी। इसके पहले सरकार को कई प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। फिलहाल पंचायती राज विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि परिसीमन संबंधी प्रावधानों को लागू करने के लिए विधानमंडल के मानसून सत्र में विधेयक लाया जाए या अधिसूचना जारी कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

सरकार द्वारा आवश्यक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। इसके बाद आयोग जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर परिसीमन की वास्तविक प्रक्रिया शुरू करेगा।

पंचायत चुनाव पर पड़ेगा व्यापक असर

परिसीमन लागू होने के बाद कई पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी। अनेक वार्ड नए सिरे से गठित होंगे और कई क्षेत्रों में प्रतिनिधियों की संख्या भी बढ़ सकती है। इससे आगामी पंचायत चुनाव में बड़ी संख्या में वर्तमान और नए संभावित प्रत्याशियों के चुनाव क्षेत्र बदल जाएंगे। इसलिए बिहार का अगला पंचायत चुनाव नए परिसीमन के आधार पर होने की संभावना है।

परिसीमन के प्रमुख मानक

  • वार्ड सदस्य: प्रति 500 की आबादी पर एक निर्वाचन क्षेत्र।
  • मुखिया: लगभग 5,000 की आबादी पर एक निर्वाचन क्षेत्र।
  • पंचायत समिति सदस्य: लगभग 5,000 की आबादी पर एक निर्वाचन क्षेत्र।
  • जिला परिषद सदस्य: लगभग 50,000 की आबादी पर एक निर्वाचन क्षेत्र।
  • ग्राम कचहरी:  लगभक 500 पर पंच व 5000 पर सरपंच निर्वाचन क्षेत्रों का गठन किया जाएगा।

बिहार सरकार द्वारा परिसीमन संबंधी अगली अधिसूचना या विधायी निर्णय के बाद राज्य निर्वाचन आयोग पूरे राज्य में चुनाव क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसके बाद पंचायत चुनाव की तैयारियां नए चरण में प्रवेश करेंगी।

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