नगरपालिका चुनाव 2026 : आठ नगर निकायों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शुरू, 17 जून तक मांगा गया प्रस्ताव
पटना. बिहार में नगरपालिका चुनाव 2026 की तैयारी के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने आठ नगर निकायों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. आयोग ने संबंधित जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि 17 जून तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं के लिए आरक्षण आवंटन का प्रस्ताव तैयार कर आयोग को भेजा जाये. यहां पर नये सिरे से आरक्षण को लागू किया जायेगा.
किन नगरपालिकाओं में लागू होगा नया आरक्षण
आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार जिन आठ नगरपालिका क्षेत्रों में आरक्षण प्रस्ताव मांगा गया है उनमें नगर परिषद दानापुर निजामत, नगर परिषद फुलवारीशरीफ, नगर परिषद खगौल, नगर परिषद सोनपुर, नगर पंचायत जहानाबाद, नगर पंचायत मखनपुर, नगर पंचायत मधुबन एवं नगर पंचायत महाराजगंज शामिल हैं.
इन सभी नगर निकायों में पार्षद पदों के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया बिहार नगरपालिका अधिनियम और बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली के तहत की जायेगी. आरक्षण निर्धारण में संबंधित निकाय की जनसंख्या को आधार बनाया जायेगा और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं के लिए सीटों का आवंटन तय किया जायेगा.
2011 की जनसंख्या पर ही लागू होगा आरक्षण
राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि आरक्षण प्रस्ताव तैयार करते समय निर्धारित प्रपत्रों का उपयोग किया जाये. संबंधित जिला प्रशासन को वार्डवार जनसंख्या, वर्गवार जनसंख्या और आरक्षण से जुड़ा पूरा ब्यौरा निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोग को उपलब्ध कराना होगा.
आयोग करेगा प्रस्तावों का सत्यापन
महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग ने इस बार आरक्षण प्रक्रिया में तकनीकी सत्यापन को भी अनिवार्य किया है. आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि नगर निकायों से प्राप्त आरक्षण प्रस्तावों की जांच आयोग स्तर पर तैयार विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जायेगी. इस जांच के बाद ही संबंधित नगरपालिकाओं के वार्डों में आरक्षण का अंतिम प्रावधान लागू किया जायेगा.
आयोग का मानना है कि सॉफ्टवेयर आधारित सत्यापन व्यवस्था लागू होने से आरक्षण निर्धारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनेगी. इससे जनसंख्या अनुपात और आरक्षण नियमों के पालन की डिजिटल स्तर पर जांच संभव होगी.
प्रस्ताव मिलने पर मिलेगा अनुमोदन
निर्देश के अनुसार पहले नगर निकायों से प्रस्ताव प्राप्त किये जायेंगे, फिर आयोग स्तर पर उनकी समीक्षा होगी. यदि किसी स्तर पर विसंगति पायी जाती है तो सुधार के लिए संबंधित निकाय को वापस भेजा जा सकता है. अंतिम अनुमोदन के बाद ही वार्डवार आरक्षण सूची प्रकाशित की जायेगी.
नगरपालिका चुनाव को देखते हुए आयोग की इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी प्रक्रिया के आधार पर आगामी चुनाव में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण किया जायेगा.

