पटना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कैबिनेट के पंचायतीराज मंत्री दीपक प्रकाश के किस्मत की लकीर साफ नहीं हो रही है. बिहार विधानसभा या विधानपरिषद के बिना सदस्य बने दूसरी बार कैबिनेट मंत्री तो बन गये. दोनों बार पंचायती राज मंत्री का पद मिला. पर सदस्यता की तलवार अभी लटक रही है. विधान परिषद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट सहित कुल 10 सीटें रिक्त तो हुई है. पर अभी तक दीपक प्रकाश को एनडीए कोटे से प्रत्याशी नहीं बनाया गया है.
एनडीए की सूची में नाम नहीं
एनडीए की ओर से कुल नौ प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की जा चुकी है. नौ सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत पक्की है. 10 वीं सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है. इसमें भाजपा कोटे से चार और जदयू कोटे से चार-चार नामों के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की जा चुकी है. एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के त्यागपत्र से खाली हुई है. ऐसे में उस सीट पर उप चुनाव होना है. एनडीए के घटक दल लोजपा (रामविलास) ने नौंवी सीट पर अपना प्रत्याशी उतार दिया है. ऐसे में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ गयी है. इसी नौंवे सीट को लेकर राजद भी अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है. ऐसे में इस नौंवीं सीट पर मतदान हुआ तो संकट बढ़ सकती है.
सभी सदस्य विधानसभा कोटे से चुने जायेंगें
सभी 10 सीटों पर होनेवाला चुनाव विधानसभा कोटे से होगा. यानी बिहार विधानसभा के सदस्य (विधयाक) विधान परिषद सदस्यों का मतदान से चुनाव करेंगे. जिस दल के पास जितने विधायक होंगे उनके प्रत्याशी की जीत पक्की है. भाजपा कोट से भोजपुरी के सिने स्टार और गायक पवन सिंह के अलावा संजय प्रकाश, अनिल ठाकुर और शीला पंडित को अपना प्रत्याशी बनाया है जबकि जदयू कोटे से पूर्व मुख्यमंत्री निशांत कुमार, शिवानी प्रजापति, भारती मेहता और ललन प्रसाद को प्रत्याशी बनाया गया है. लोजपा (रा) ने अल्पसंख्यक नेता अशरफ अंसारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है.
उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं दीपक
इसी पेंच में दीपक प्रकाश की सदस्यता फंसी हुई है. दीपक प्रकाश जी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता व राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं. खुद उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा के सदस्य हैं जबकि उनकी पत्नी विधायक हैं. पुत्र को उन्होंने एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाने में सफलता भी पायी.
बिना सदस्य बने दूसरी बार मंत्री पद पर
यह दूसरी बार है जब उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र व पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के मंत्री बना दिये गये हैं. पहली बार वे विधानसभा आम चुनाव के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट भी पंचायती राज मंत्री पद पर काम कर रहे थे. मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के सत्ता त्यागने के बाद से नयी सरकार सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित हुई. पहला कार्यकाल छह माह पूरा नहीं हुआ था और दूसरी सरकार बन गयी. एक बार फिर उनको एनडीए की सम्राट चौधरी की सरकार में पंचायती राज विभाग की जिम्मेवारी मिली. पर चुनौती इस बार भी खत्म नहीं हुई.
जानकारों का कहना है कि कोई भी मंत्री बिना किसी सदन की सदस्यता के छह माह तक अपने पद पर बना रह सकता है. इस बीच उसको या तो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना अनिवार्य है. अगर छह माह में वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता है तो वह पद पर नहीं बना रह सकता है.
आगे क्या
बताया जा रहा है कि एनडीए सरकार में दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है तो सोच-समझ कर रणनीति तैयार की गयी होगी.

